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TamilNadu Politics – नीति आयोग बैठक में शामिल हुए सीएम विजय

TamilNadu Politics – तमिलनाडु की राजनीति में हाल के घटनाक्रम केंद्र और राज्य के संबंधों को लेकर एक नए दृष्टिकोण की ओर संकेत कर रहे हैं। राज्य के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने नई दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक में भाग लेकर सहयोगात्मक संघवाद के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई। उनका यह कदम राज्य की पिछली सरकार के रुख से अलग माना जा रहा है, जिसने कई अवसरों पर केंद्र सरकार के साथ मतभेदों को प्रमुखता से उठाया था।

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बैठक में शामिल होने के बाद मुख्यमंत्री विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अलग से मुलाकात भी की। हाल के हफ्तों में दोनों नेताओं के बीच यह दूसरी औपचारिक बैठक रही, जिससे केंद्र और राज्य के बीच संवाद बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

विकास परियोजनाओं पर हुई चर्चा

मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय ने पहली बार मई के अंत में प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी। उस दौरान उन्होंने तमिलनाडु से जुड़ी कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं और कल्याणकारी योजनाओं के लिए केंद्रीय सहयोग की मांग रखी थी।

सूत्रों के अनुसार, उन्होंने बुनियादी ढांचे के विस्तार, वित्तीय सहायता और राज्य की प्रमुख परियोजनाओं को मंजूरी देने जैसे विषयों पर चर्चा की। इसके साथ ही मेकेदातू जल विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी केंद्र के हस्तक्षेप का अनुरोध किया गया था। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी मुलाकात कर राज्य के लिए अतिरिक्त बजटीय सहायता की आवश्यकता पर जोर दिया था।

नीति आयोग की बैठक में उठाया NEET का मुद्दा

नीति आयोग की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने चिकित्सा शिक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से रखा। उन्होंने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) को लेकर तमिलनाडु सरकार की आपत्तियों को दोहराया और कहा कि यह परीक्षा ग्रामीण तथा आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों के लिए चुनौतियां पैदा कर रही है।

उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि राज्य को चिकित्सा, दंत चिकित्सा और आयुष पाठ्यक्रमों की राज्य कोटा सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया तय करने में अधिक लचीलापन दिया जाए। विजय का तर्क था कि स्थानीय परिस्थितियों और छात्रों की सामाजिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए।

सत्ता संभालने के बाद बदला राजनीतिक अंदाज

विधानसभा चुनाव अभियान के दौरान विजय ने भारतीय जनता पार्टी की नीतियों की आलोचना की थी और वैचारिक मतभेदों को खुलकर सामने रखा था। हालांकि, मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके सार्वजनिक रुख में अधिक संतुलित और प्रशासनिक दृष्टिकोण दिखाई दे रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शासन की जिम्मेदारी संभालने के बाद विजय ने विकास और प्रशासनिक सहयोग को प्राथमिकता दी है। यही वजह है कि केंद्र सरकार के साथ संवाद बनाए रखने पर उनका विशेष ध्यान दिखाई दे रहा है।

परीक्षा व्यवस्था पर केंद्रित रही आलोचना

हाल के महीनों में NEET को लेकर देशभर में बहस होती रही है। कई विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सीधे केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, विजय ने अपने बयानों में व्यक्तिगत या राजनीतिक आरोप लगाने के बजाय परीक्षा व्यवस्था की संरचनात्मक चुनौतियों पर फोकस किया।

उन्होंने कहा कि छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रवेश प्रणाली की समीक्षा की आवश्यकता है। उनके अनुसार, शिक्षा से जुड़े निर्णयों का उद्देश्य अवसरों की समानता सुनिश्चित करना होना चाहिए।

पूर्व सरकार के रुख से अलग दिखाई दी रणनीति

मुख्यमंत्री विजय का वर्तमान रुख राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की नीति से अलग माना जा रहा है। स्टालिन ने केंद्र-राज्य संबंधों से जुड़े मुद्दों को लेकर कई बार सार्वजनिक असहमति जताई थी और कुछ अवसरों पर नीति आयोग की बैठकों में शामिल भी नहीं हुए थे।

इसके विपरीत, विजय ने संवाद और भागीदारी का रास्ता अपनाते हुए राज्य के हितों को राष्ट्रीय मंच पर रखने की रणनीति अपनाई है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले समय में यह दृष्टिकोण तमिलनाडु और केंद्र सरकार के संबंधों को नई दिशा दे सकता है।

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