बिज़नेस

FuelPolicy – थोक ग्राहकों के लिए बदले ईंधन खरीद नियम, लागू हुई नई सीमा

FuelPolicy – केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की बिक्री व्यवस्था को लेकर नया निर्देश जारी किया है। ताजा आदेश के अनुसार, बड़े पैमाने पर ईंधन खरीदने वाले औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ता अब सामान्य रिटेल पेट्रोल पंपों से पेट्रोल या डीजल नहीं खरीद सकेंगे। इसके साथ ही डीजल की खुदरा बिक्री पर भी सीमा तय की गई है, जिसके तहत एक वाहन को एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल ही उपलब्ध कराया जा सकेगा।

fuel purchase rules limit update

सरकार का कहना है कि यह कदम ईंधन वितरण प्रणाली को व्यवस्थित बनाने और विभिन्न श्रेणियों के उपभोक्ताओं के लिए आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

किन उपभोक्ताओं पर लागू होगा नया नियम

11 जून को जारी अधिसूचना के अनुसार, Essential Commodities Act के तहत कई संस्थानों को रिटेल आउटलेट्स से ईंधन खरीदने पर रोक लगाई गई है। इनमें औद्योगिक इकाइयां, बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान, आईटी पार्क, शॉपिंग मॉल और कुछ सरकारी विभाग शामिल हैं।

इन संस्थानों को अपनी जरूरतों के लिए निर्धारित उपभोक्ता या बल्क फ्यूल आउटलेट्स से ही ईंधन खरीदना होगा। सरकार का मानना है कि इससे खुदरा पंपों पर दबाव कम होगा और आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की उपलब्धता बेहतर बनी रहेगी।

डीजल बिक्री पर विशेष निगरानी

नई व्यवस्था में डीजल की बिक्री को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरती गई है। अधिकारियों के अनुसार, यह अस्थायी प्रावधान अधिकतम 90 दिनों तक प्रभावी रह सकता है। इस दौरान डीजल की खुदरा खरीद पर तय सीमा लागू रहेगी।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह निर्णय ईंधन के अनुचित उपयोग और वितरण में संभावित गड़बड़ियों को रोकने के लिए लिया गया है। साथ ही विभिन्न श्रेणियों के उपभोक्ताओं के लिए निर्धारित मूल्य संरचना का पालन सुनिश्चित करना भी इसका उद्देश्य बताया गया है।

मूल्य अंतर बना चिंता का विषय

विशेषज्ञों का मानना है कि खुदरा और बल्क ईंधन की कीमतों के बीच मौजूद अंतर भी इस फैसले का एक प्रमुख कारण है। कई शहरों में डीजल की खुदरा कीमत और थोक दरों में उल्लेखनीय अंतर देखने को मिला है।

सरकार का मानना है कि इस अंतर के कारण कुछ मामलों में ईंधन के गलत चैनलों के माध्यम से उपयोग की आशंका बढ़ जाती है। नई व्यवस्था के जरिए ऐसे मामलों को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है।

वैश्विक बाजार में नरमी के संकेत

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हाल के दिनों में कुछ गिरावट दर्ज की गई है। कुछ समय पहले वैश्विक तनाव और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गए थे। हालांकि अब कीमतों में कमी आने के संकेत दिखाई दे रहे हैं।

ताजा कारोबारी सत्र में क्रूड ऑयल की कीमत लगभग 86 डॉलर प्रति बैरल के आसपास दर्ज की गई। इससे आयात पर निर्भर देशों को कुछ राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं तेल कीमतें

भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलावों का सीधा असर देश की ऊर्जा लागत और आयात बिल पर पड़ता है।

हाल के महीनों में तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण घरेलू बाजार भी प्रभावित हुआ है। हालांकि जून महीने में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई नई वृद्धि नहीं की गई है। इससे पहले मई में ईंधन दरों में कई बार संशोधन हुआ था, जिसके बाद पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।

नई ईंधन नीति को फिलहाल आपूर्ति प्रबंधन और वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में उठाया गया एक प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.