Sanctions – ईरान के प्रति नरम रुख के संकेत, ट्रंप ने पाबंदियों पर दी बड़ी टिप्पणी
Sanctions – अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए संकेत दिया है कि यदि तेहरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपेक्षित व्यवहार अपनाता है, तो उस पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों को हटाने पर विचार किया जा सकता है। ट्रंप ने कहा कि मौजूदा प्रतिबंधों का असर ईरान की अर्थव्यवस्था और वहां की आम जनता पर गहराई से पड़ता है, इसलिए सकारात्मक कदमों की स्थिति में राहत संभव है।

प्रतिबंधों को लेकर ट्रंप का रुख
एक बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि कुछ आर्थिक पाबंदियां इतनी कठोर हैं कि वे किसी देश की पुनर्बहाली की संभावनाओं को लंबे समय तक प्रभावित कर सकती हैं। उनके अनुसार, यदि ईरान सहयोगात्मक रवैया दिखाता है और अंतरराष्ट्रीय अपेक्षाओं के अनुरूप कदम उठाता है, तो अमेरिका प्रतिबंधों में ढील देने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे कदमों का उद्देश्य केवल दबाव बनाना नहीं, बल्कि व्यवहार में बदलाव लाना होता है।
रोके गए फंड पर भी दिया संकेत
ट्रंप ने ईरान के उन वित्तीय संसाधनों का भी उल्लेख किया जो विभिन्न कारणों से रोके गए हैं। उन्होंने कहा कि यह धन मूल रूप से ईरान का है और भविष्य में इसे लौटाने का प्रश्न भी उठ सकता है। ट्रंप के मुताबिक, वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में भरोसा बनाए रखने के लिए संपत्तियों और निवेश से जुड़े मामलों में स्पष्टता और विश्वसनीयता जरूरी है। उन्होंने संकेत दिया कि लंबे समय में इस विषय पर भी निर्णय लिया जा सकता है।
सुलेमानी पर कार्रवाई को बताया अहम मोड़
ईरान के साथ हुए समझौते और कूटनीतिक प्रगति का जिक्र करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि यह प्रक्रिया अचानक शुरू नहीं हुई थी। उन्होंने कहा कि जनवरी 2020 में ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी पर की गई अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने क्षेत्रीय समीकरणों को बदल दिया था। ट्रंप का मानना है कि उस फैसले ने आगे चलकर बातचीत और समझौते की संभावनाओं के लिए एक नया माहौल तैयार किया।
लंबे समय की रणनीति का परिणाम
ट्रंप ने यह भी कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते को केवल कुछ महीनों की उपलब्धि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, ईरान से जुड़ी मौजूदा कूटनीतिक स्थिति कई वर्षों की रणनीति, दबाव और बातचीत का परिणाम है। उन्होंने दावा किया कि विभिन्न चरणों में उठाए गए कदमों ने अंततः वार्ता की जमीन तैयार की और इसी वजह से समझौते तक पहुंचना संभव हो सका।