Investigation – केतन अग्रवाल हत्या मामले में दोनों आरोपियों की 3 जुलाई तक बढ़ी पुलिस हिरासत
Investigation – पुणे में चर्चित केतन अग्रवाल हत्या मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने मुख्य आरोपी सिया अग्रवाल और उसके साथ गिरफ्तार चेतन चौधरी की पुलिस हिरासत 3 जुलाई तक बढ़ाने की अनुमति दी है। पुलिस का कहना है कि जांच अभी कई महत्वपूर्ण चरणों में है और कुछ ऐसे साक्ष्य जुटाए जाने बाकी हैं, जो पूरे घटनाक्रम को स्पष्ट करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

जांच के कई अहम बिंदुओं पर पुलिस का फोकस
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि जांच टीम लोहागढ़ किले में उस सटीक स्थान की पहचान करना चाहती है, जहां कथित तौर पर घटना को अंजाम दिया गया। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि क्या आरोपियों ने घटना से पहले कई बार किले का दौरा कर संभावित जगह का चयन किया था। अधिकारियों के अनुसार, घटनास्थल का दोबारा निरीक्षण और घटनाक्रम का पुनर्निर्माण जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
पासपोर्ट की तलाश भी जांच का हिस्सा
पुलिस ने अदालत को बताया कि मृतक केतन अग्रवाल का पासपोर्ट अभी तक बरामद नहीं हो सका है। जांच एजेंसियों के अनुसार, 6 जून को मुंबई की ओर जाते समय पासपोर्ट को रास्ते में कहीं फेंके जाने की आशंका है। इस संबंध में पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है ताकि दस्तावेज की बरामदगी हो सके और उससे जुड़े तथ्यों की पुष्टि की जा सके।
बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से पेश अधिवक्ता ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि गिरफ्तारी के लिए पर्याप्त और ठोस आधार मौजूद नहीं हैं। बचाव पक्ष ने हिरासत बढ़ाने का भी विरोध किया। हालांकि, अदालत ने पुलिस की दलीलों और जांच की आवश्यकता को देखते हुए हिरासत अवधि बढ़ाने का आदेश दिया।
गेट एनालिसिस से होगी गतिविधियों की पड़ताल
जांच अधिकारियों ने बताया कि मामले में गेट एनालिसिस को भी प्राथमिकता दी जा रही है। इसके तहत आरोपी की चाल, शरीर की गतिविधियों और घटनास्थल तक पहुंचने के तरीके का अध्ययन किया जाएगा। पुलिस के पास उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज में कथित तौर पर चेतन चौधरी हुडी पहनकर लोहागढ़ किले की ओर जाता दिखाई देता है। अब उसी तरह की परिस्थितियों में घटनास्थल पर वीडियो रिकॉर्ड कर दोनों फुटेज का तुलनात्मक विश्लेषण किया जाएगा।
मोबाइल डेटा और संभावित मुलाकातों की जांच जारी
पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन से डिजिटल डेटा जुटाने की प्रक्रिया जारी है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ महत्वपूर्ण जानकारी हटाने का प्रयास किया गया था। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि दोनों आरोपी किन स्थानों पर मिलते थे और कथित साजिश से जुड़े घटनाक्रम कैसे आगे बढ़े। इसके अलावा, कुछ नए गवाहों की पहचान हुई है, जिनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं और आवश्यकता पड़ने पर उनका आरोपियों से आमना-सामना भी कराया जाएगा।
घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी जांच एजेंसी
पुलिस का कहना है कि जांच का उद्देश्य उपलब्ध सभी साक्ष्यों, तकनीकी विश्लेषण और गवाहों के बयानों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ना है। अदालत में पेश किए गए तथ्यों के अनुसार, घटनास्थल, डिजिटल साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज और लापता दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।