राष्ट्रीय

Climate – जून में बारिश की बड़ी कमी, पिछले सौ वर्षों के सबसे शुष्क महीनों में शामिल होने की आशंका

Climate – देश में जून का महीना समाप्ति की ओर है, लेकिन इस बार मानसून की रफ्तार उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी। भारतीय मौसम विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पूरे देश में सामान्य के मुकाबले करीब 42 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। यदि अंतिम दिन कुछ इलाकों में अच्छी बारिश भी हो जाए, तब भी जून 2026 पिछले लगभग एक शताब्दी के सबसे कम वर्षा वाले जून महीनों में शामिल हो सकता है। विशेषज्ञ इस स्थिति के पीछे अल नीनो के बढ़ते प्रभाव को प्रमुख कारण मान रहे हैं।

el nino june rainfall india

वर्षा के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

अब तक जून में देशभर में औसतन 92.2 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है, जबकि सामान्य परिस्थितियों में यह आंकड़ा करीब 157.7 मिलीमीटर होना चाहिए। अनुमान है कि महीने के अंत तक कुल वर्षा लगभग 100 मिलीमीटर के आसपास ही पहुंचेगी। यदि ऐसा होता है तो वर्ष 1927 से अब तक के रिकॉर्ड में केवल 2009 और 2014 ऐसे वर्ष रहेंगे, जब जून में इससे भी कम वर्षा दर्ज की गई थी। इससे साफ संकेत मिलता है कि इस बार मानसून की शुरुआत अपेक्षा से काफी कमजोर रही।

मानसून की रफ्तार पूरे महीने बनी सुस्त

केरल में 4 जून को मानसून के प्रवेश के बाद सामान्य तौर पर इसके तेजी से आगे बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन पूरे महीने इसकी सक्रियता सीमित रही। जून के दौरान केवल एक दिन ऐसा रहा जब देशभर में दैनिक वर्षा सामान्य स्तर से अधिक दर्ज की गई। बाकी अधिकांश दिनों में बारिश औसत से कम रही, जिसका असर कई राज्यों में खेती और जल संसाधनों पर भी दिखाई देने लगा है।

मध्य भारत में सबसे अधिक बारिश की कमी

बारिश की कमी का असर देश के सभी प्रमुख क्षेत्रों में देखने को मिला, हालांकि सबसे गंभीर स्थिति मध्य भारत की रही। यहां सामान्य से लगभग 54 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में 41 प्रतिशत, उत्तर-पश्चिम भारत में 30 प्रतिशत और दक्षिण भारत में 28 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। चारों भौगोलिक क्षेत्रों में एक साथ इतनी बड़ी कमी होना मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार असामान्य स्थिति मानी जा रही है।

अल नीनो के प्रभाव पर विशेषज्ञों की नजर

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्री सतह के तापमान में बढ़ोतरी के कारण अल नीनो की स्थिति मजबूत हो रही है। अंतरराष्ट्रीय मौसम संस्थानों की हालिया रिपोर्ट में भी संकेत दिया गया है कि यह प्रणाली आने वाले महीनों में और प्रभावी हो सकती है। इसका असर भारत सहित कई देशों के मौसम चक्र पर पड़ने की संभावना जताई गई है, जिससे मानसून की गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है।

जुलाई के पहले सप्ताह से बेहतर बारिश की संभावना

कमजोर शुरुआत के बावजूद मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए राहत की उम्मीद जताई है। विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार जुलाई के पहले सप्ताह में देश के अधिकांश हिस्सों में व्यापक और अच्छी बारिश होने की संभावना है। विशेष रूप से मध्य भारत में वर्षा की गतिविधियां बढ़ सकती हैं, जिससे अब तक बनी बारिश की कमी कुछ हद तक कम होने की उम्मीद है। यदि अनुमान सही साबित होते हैं तो कृषि कार्यों और जल भंडारण की स्थिति में भी सुधार देखने को मिल सकता है।

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.