CabinetReshuffle – मोदी सरकार में संभावित फेरबदल को लेकर चर्चाएं तेज, 2021 जैसे बदलाव की अटकलें
CabinetReshuffle – केंद्र सरकार में संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार में कुछ मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं, जबकि कुछ नए चेहरों को भी जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में सभी अटकलें राजनीतिक चर्चाओं और विभिन्न मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं।

2021 का कैबिनेट विस्तार बना था बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल के दौरान 7 जुलाई 2021 को व्यापक मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल किया गया था। यह 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद सरकार का सबसे बड़ा पुनर्गठन माना गया। उस समय 12 मंत्रियों ने पद छोड़ा था, जबकि 43 नेताओं ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में मंत्री पद की शपथ ली थी। इस बदलाव के बाद प्रधानमंत्री सहित मंत्रिपरिषद की संख्या संवैधानिक सीमा के करीब पहुंच गई थी।
कई वरिष्ठ नेताओं को मंत्रिमंडल से किया गया था बाहर
2021 के फेरबदल में कई अनुभवी नेताओं को मंत्रिमंडल से बाहर किया गया था। तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने पद छोड़ा, वहीं रविशंकर प्रसाद, प्रकाश जावड़ेकर और रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ जैसे प्रमुख नेताओं को भी नई टीम में जगह नहीं मिली। इसके अलावा सदानंद गौड़ा, संतोष गंगवार, थावरचंद गहलोत और बाबुल सुप्रियो सहित कई अन्य नेताओं का भी मंत्रिमंडल से बाहर होना उस समय चर्चा का विषय बना था।
नए चेहरों और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व पर दिया गया था जोर
2021 के विस्तार में 15 कैबिनेट मंत्री और 28 राज्य मंत्रियों को शामिल किया गया था। सरकार ने इस दौरान विभिन्न राज्यों, सामाजिक वर्गों और युवा नेतृत्व को प्रतिनिधित्व देने की रणनीति अपनाई थी। असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल, नारायण राणे, ज्योतिरादित्य सिंधिया, अश्विनी वैष्णव, भूपेंद्र यादव, वीरेंद्र कुमार, आरसीपी सिंह और पशुपति कुमार पारस को कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। वहीं किरेन रिजिजू, हरदीप सिंह पुरी, अनुराग ठाकुर, मनसुख मांडविया, आर.के. सिंह, पुरुषोत्तम रूपाला और जी. किशन रेड्डी को पदोन्नति देकर कैबिनेट में शामिल किया गया था।
उत्तर प्रदेश के चुनावी समीकरणों को भी मिली थी प्राथमिकता
उस समय उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए राज्य से सात नेताओं को राज्य मंत्री बनाया गया था। इनमें पंकज चौधरी, अनुप्रिया पटेल, भानु प्रताप सिंह वर्मा, कौशल किशोर, एसपीएस बघेल, अजय कुमार और बीएल वर्मा शामिल थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि इस फैसले के जरिए सरकार ने क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को मजबूत करने का प्रयास किया था।
मौजूदा फेरबदल को लेकर क्या हैं चर्चाएं
अब प्रधानमंत्री मोदी के तीसरे कार्यकाल के दौरान एक और संभावित कैबिनेट फेरबदल की चर्चा हो रही है। माना जा रहा है कि संसद के मानसून सत्र से पहले या उसके आसपास सरकार मंत्रिमंडल में बदलाव कर सकती है। राजनीतिक विश्लेषणों में प्रदर्शन, प्रशासनिक जरूरत, क्षेत्रीय संतुलन, युवा नेतृत्व को अवसर और भविष्य की चुनावी रणनीति जैसे पहलुओं को संभावित कारण बताया जा रहा है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक किसी भी बदलाव की पुष्टि नहीं की गई है।
किन मंत्रियों के नाम चर्चा में हैं
मीडिया रिपोर्टों और राजनीतिक अटकलों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े हालिया विवादों के बाद उनके विभाग में बदलाव या नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है। इसी तरह पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को लेकर भी विभिन्न तरह की चर्चाएं सामने आई हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के संबंध में भी कुछ रिपोर्टों में विभागीय बदलाव की अटकलें लगाई गई हैं, लेकिन इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अंतिम फैसला प्रधानमंत्री और सरकार के शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर ही लिया जाएगा।