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Japan – भारत दौरे में निवेश, व्यापार और रणनीतिक सहयोग पर रहेगा विशेष जोर…

Japan – जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की प्रस्तावित भारत यात्रा को दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार इस दौरे के दौरान निवेश, व्यापार, उभरती प्रौद्योगिकियों, पूर्वोत्तर भारत के विकास और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे कई प्रमुख विषयों पर चर्चा हो सकती है। इसके अलावा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के मुद्दे भी वार्ता का हिस्सा बनने की संभावना है।

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निवेश और आधारभूत ढांचे पर हो सकता है बड़ा फैसला

भारत में आधारभूत ढांचे के विकास, ऑटोमोबाइल उद्योग और भारी औद्योगिक परियोजनाओं में जापान लंबे समय से महत्वपूर्ण निवेशक रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में जापान की भागीदारी आगे भी अहम बनी रहेगी। मौजूदा समय में जापान का भारत में कुल निवेश लगभग 44 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, जिससे वह प्रमुख विदेशी निवेशकों में शामिल है। माना जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान नई निवेश योजनाओं या परियोजनाओं की घोषणा भी की जा सकती है।

उभरती तकनीकों में सहयोग पर रहेगा फोकस

दोनों देश कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आधुनिक प्रौद्योगिकी और अनुसंधान से जुड़े कई संयुक्त कार्यक्रमों पर पहले से काम कर रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार भारत और जापान 100 से अधिक तकनीकी परियोजनाओं में सहयोग कर रहे हैं। इस यात्रा के दौरान Artificial Intelligence सहित नई तकनीकों में साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं होने की संभावना जताई जा रही है। इससे अनुसंधान, नवाचार और औद्योगिक सहयोग को नई दिशा मिल सकती है।

पूर्वोत्तर भारत के विकास पर भी होगी चर्चा

भारत की Act East Policy के तहत पूर्वोत्तर राज्यों के विकास में जापान लगातार सहयोग करता रहा है। वर्ष 2017 में गठित India-Japan Act East Forum के माध्यम से क्षेत्र में संपर्क, आधारभूत ढांचा और विकास परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। पिछले एक वर्ष में जापान के कई उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों ने मेघालय, असम और मणिपुर का दौरा किया, जबकि पूर्वोत्तर के कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी जापान जाकर निवेश और सहयोग के अवसरों पर चर्चा कर चुके हैं।

व्यापार संतुलन पर दोनों देशों की नजर

विदेश मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार दोनों नेताओं की बैठक में व्यापारिक संबंधों को अधिक संतुलित बनाने पर भी विचार-विमर्श हो सकता है। भारत और जापान के बीच वर्ष 2011 से आर्थिक साझेदारी समझौता लागू है, लेकिन व्यापारिक आंकड़ों में फिलहाल जापान का पलड़ा भारी माना जाता है। दोनों देशों के बीच करीब 27 अरब डॉलर का वार्षिक व्यापार होता है, जिसमें भारत का निर्यात लगभग 6 अरब डॉलर और आयात करीब 21 अरब डॉलर है। ऐसे में भारत इस समझौते की समीक्षा और संतुलित व्यापार व्यवस्था पर जोर दे सकता है।

हिंद-प्रशांत और क्वाड सहयोग पर भी रह सकती है चर्चा

आर्थिक सहयोग के साथ-साथ सुरक्षा और क्षेत्रीय रणनीति भी इस यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है। भारत और जापान, Quad समूह के सदस्य होने के नाते हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्वतंत्र और सुरक्षित समुद्री व्यवस्था का समर्थन करते हैं। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि बैठक के दौरान Quad की गतिविधियों को अधिक सक्रिय बनाने और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने पर भी विचार किया जा सकता है। जापान लंबे समय से इस मंच को क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग के लिए महत्वपूर्ण मानता रहा है।

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