बिहार

RoadSafety – बिहार के हाईवे पर अवैध कट बढ़ा रहे हादसों का खतरा, सुरक्षा पर उठे सवाल

RoadSafety – बिहार के विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों पर बने अवैध कट लगातार सड़क दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बनते जा रहे हैं। पटना-बख्तियारपुर, पटना-गया-डोभी और बिहटा-सरमेरा फोरलेन समेत कई प्रमुख मार्गों पर ऐसे स्थान सामने आए हैं, जहां वाहन चालकों की छोटी सी चूक भी गंभीर हादसे में बदल जाती है। स्थानीय स्तर पर बनाए गए अनधिकृत रास्तों और कुछ स्थानों पर मौजूद संरचनात्मक कमियों के कारण लोगों को सीधे हाईवे पार करना पड़ता है, जिससे दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ गया है। रात के समय स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती है।

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मोकामा क्षेत्र में ग्रामीणों की परेशानी बनी चुनौती

मोकामा बाइपास के पास कई गांवों की संपर्क सड़कें सीधे फोरलेन से जुड़ती हैं। मोकामा बाजार और घोसवरी प्रखंड के गोसाई गांव के बीच बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन मोटरसाइकिल, साइकिल, कार और ऑटो से हाईवे पार करते हैं। आसपास सर्विस रोड या सुविधाजनक यू-टर्न नहीं होने के कारण ग्रामीणों को इसी रास्ते का सहारा लेना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था होती तो इस तरह जान जोखिम में डालकर सड़क पार करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। यहां चेतावनी संकेत, स्पीड नियंत्रण के उपाय और रिफ्लेक्टर जैसी बुनियादी सुरक्षा सुविधाओं का भी अभाव बताया जा रहा है।

कई स्थानों पर बंद हुए कट, फिर भी बनी हुई है समस्या

पटना-बख्तियारपुर फोरलेन पर पहले बड़ी संख्या में अवैध कट मौजूद थे। इनमें से कई को प्रशासन ने बंद कराया है, जिससे दुर्घटनाओं में कुछ कमी आई है। हालांकि विक्रमपुर और आसपास के इलाकों में अब भी ऐसे स्थान मौजूद हैं, जहां लोगों ने अपनी सुविधा के लिए डिवाइडर काटकर रास्ता बना लिया है। इन रास्तों से गुजरते समय कई वाहन सीधे विपरीत दिशा से आने वाले ट्रैफिक के सामने पहुंच जाते हैं, जिससे गंभीर हादसे की आशंका बनी रहती है। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ भी ऐसे अनधिकृत कटों को अत्यंत जोखिमपूर्ण मानते हैं।

बिहटा-सरमेरा मार्ग पर भी बनी हुई है चिंता

बिहटा-सरमेरा फोरलेन के चेचौल गांव के समीप भी इसी तरह का एक अवैध कट स्थानीय लोगों द्वारा उपयोग किया जा रहा है। यह संपर्क मार्ग आसपास के कई गांवों को राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह रास्ता बंद कर दिया जाए तो उन्हें कई किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी। इसी कारण कुछ लोग गलत दिशा में वाहन चलाने का भी जोखिम उठाते हैं। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से यहां ओवरब्रिज या अंडरपास जैसी स्थायी सुविधा की मांग की जा रही है।

सुरक्षित समाधान तलाशने की जरूरत

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार कुछ स्थानों पर अंडरपास जैसी योजनाएं प्रस्तावित थीं, लेकिन विभिन्न कारणों से उन्हें लागू नहीं किया जा सका। वहीं पुलिस और संबंधित एजेंसियों ने कई बार अवैध कट बंद कराने का प्रयास भी किया, लेकिन स्थानीय परिस्थितियों के कारण अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जहां लोगों की वास्तविक जरूरत है, वहां नियोजित ढंग से अंडरपास, सर्विस रोड या सुरक्षित यू-टर्न जैसी सुविधाएं विकसित की जाएं। इससे दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के साथ यात्रियों और स्थानीय नागरिकों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

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