TaxPolicy – पंचायत कर प्रस्ताव पर बिहार ने उठाई वित्त आयोग से शर्तों में राहत की मांग
TaxPolicy – बिहार सरकार ने 16वें वित्त आयोग की उस प्रस्तावित व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग की है, जिसमें ग्राम पंचायतों के लिए प्रत्येक घर से वार्षिक कर संग्रह की शर्त जोड़ी गई है। नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान राज्य के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि बिहार जैसे बड़े ग्रामीण आबादी वाले राज्यों के लिए हर परिवार से सालाना 1200 रुपये कर वसूलने की अनिवार्यता व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने आयोग से इस शर्त में संशोधन या इसे समाप्त करने का आग्रह किया।

वित्त आयोग की अनुशंसाओं पर बिहार का पक्ष
कार्यशाला में मंत्री ने कहा कि वित्त आयोग से मिलने वाली अनुदान राशि का उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ ग्रामीण विकास कार्यों में किया जाएगा। उनका कहना था कि यदि पंचायतों को पर्याप्त वित्तीय सहयोग मिलता है तो ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद जैसी संस्थाएं अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकेंगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
अनुदान राशि से जुड़ी अहम शर्तें
जानकारी के अनुसार 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत वर्ष 2026-27 से 2030-31 के बीच बिहार को लगभग 52 हजार करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। पहले वर्ष में करीब 6670 करोड़ रुपये की सहायता प्रस्तावित है। हालांकि इस पूरी राशि का लाभ पाने के लिए राज्य सरकार को निर्धारित हिस्सेदारी भी सुनिश्चित करनी होगी। इसके अलावा कुल अनुदान का एक भाग प्रदर्शन आधारित होगा, जिसमें पंचायतों और राज्य सरकार के कार्यों का मूल्यांकन किया जाएगा।
अन्य राज्यों ने भी जताई आपत्ति
राष्ट्रीय कार्यशाला में केवल बिहार ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ ने भी प्रत्येक घर से वार्षिक कर वसूली की अनिवार्यता पर आपत्ति दर्ज कराई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने की। इस दौरान विभिन्न राज्यों के पंचायती राज मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और विभागीय प्रतिनिधि मौजूद रहे तथा वित्त आयोग की सिफारिशों पर विस्तार से चर्चा की गई।
गांवों में कर व्यवस्था लागू करने की तैयारी
वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप कई राज्यों में ग्रामीण निकायों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए स्थानीय कर व्यवस्था लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। बिहार में भी प्रस्ताव है कि पंचायतें साफ-सफाई, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और अन्य स्थानीय सुविधाओं के रखरखाव के लिए शुल्क या कर वसूल सकें। बताया जा रहा है कि इस संबंध में विभागीय स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है और अंतिम निर्णय राज्य मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बाद लिया जाएगा।
आत्मनिर्भर पंचायतों पर जोर
वित्त आयोग का उद्देश्य पंचायतों को वित्तीय रूप से अधिक सक्षम बनाना है ताकि वे स्थानीय स्तर पर आवश्यक सेवाओं का संचालन अपने संसाधनों से भी कर सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नई व्यवस्था लागू होती है तो पंचायतों की आय बढ़ सकती है, लेकिन इसके साथ स्थानीय परिस्थितियों और राज्यों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को भी ध्यान में रखना आवश्यक होगा। बिहार सरकार का कहना है कि ग्रामीण हितों को प्रभावित किए बिना संतुलित समाधान निकाला जाना चाहिए।