ClimateChange – हिमालयी राज्यों में बदलता मानसून बढ़ा रहा आपदाओं का खतरा
ClimateChange – हिमालयी क्षेत्रों में इस बार मानसून का स्वरूप पहले की तुलना में अधिक अस्थिर दिखाई दे रहा है। मौसम में तेजी से हो रहे बदलावों के कारण कहीं लंबे समय तक बारिश नहीं हो रही, तो कहीं बहुत कम अवधि में अत्यधिक वर्षा दर्ज की जा रही है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, अल-नीनो जैसी वैश्विक मौसमी परिस्थितियां और पहाड़ी इलाकों में बढ़ती मानवीय गतिविधियां पारंपरिक वर्षा चक्र को प्रभावित कर रही हैं। इसका असर खेती, परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं और आधारभूत ढांचे पर साफ तौर पर देखने को मिल रहा है।

जून में बारिश की कमी, जुलाई की शुरुआत में तेज सक्रियता
इस वर्ष जून के दौरान उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश सहित कई हिमालयी राज्यों में सामान्य से काफी कम वर्षा रिकॉर्ड की गई। उत्तराखंड में लगभग 37 प्रतिशत और हिमाचल प्रदेश में करीब 35 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई। हालांकि जुलाई की शुरुआत के साथ ही मानसून ने तेजी पकड़ी और कई इलाकों में सामान्य से कहीं अधिक वर्षा हुई। उत्तराखंड में दो दिनों के भीतर लगभग 97 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई, जबकि हिमाचल प्रदेश में यह आंकड़ा 211 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गया। अन्य पर्वतीय राज्यों में भी सामान्य या उससे अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई।
अलग-अलग राज्यों में मौसम का अलग रुख
जहां जम्मू-कश्मीर में इस बार वर्षा का पैटर्न अपेक्षाकृत संतुलित बना हुआ है, वहीं सिक्किम में लगातार हो रही बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ गया है और अचानक बाढ़ की आशंका बनी हुई है। दूसरी ओर अरुणाचल प्रदेश में सामान्य की तुलना में कम वर्षा दर्ज की गई है, जिससे वहां मानसून का असर कमजोर दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अलग-अलग क्षेत्रों में मौसम की यह असमानता भविष्य में नई चुनौतियां खड़ी कर सकती है।
विशेषज्ञों ने बताई बदलते मौसम की वजह
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून प्रणाली लगातार स्थान बदलती रहती है, जिसके कारण अलग-अलग क्षेत्रों में वर्षा का वितरण समान नहीं रहता। इसे इंटरसीजनल वेरिएबिलिटी कहा जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई और अगस्त में अधिक बारिश होना सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन अब कम समय में अत्यधिक वर्षा की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। यही कारण है कि भूस्खलन, फ्लैश फ्लड और अन्य प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम पहले की तुलना में अधिक हो गया है।
हिमाचल प्रदेश में तेजी से बदल रहा वर्षा का पैटर्न
हिमाचल प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े मानसून की बढ़ती अनिश्चितता की ओर संकेत करते हैं। वर्ष 2024 में राज्य में सामान्य से 18 प्रतिशत कम बारिश हुई थी, जबकि 2025 में यही आंकड़ा सामान्य से लगभग 39 प्रतिशत अधिक पहुंच गया। मौसम विशेषज्ञ इसे सूखे और अत्यधिक वर्षा के बीच तेजी से बदलते खतरनाक रुझान के रूप में देख रहे हैं, जिसका असर जनजीवन और विकास कार्यों पर पड़ रहा है।
उत्तराखंड में कम दिनों में ज्यादा बारिश बनी चुनौती
उत्तराखंड में कुल मानसूनी वर्षा का औसत लगभग स्थिर बना हुआ है, लेकिन वर्षा का स्वरूप पहले जैसा नहीं रहा। पहले जहां बारिश पूरे मौसम में समान रूप से होती थी, वहीं अब अधिकांश वर्षा जुलाई और अगस्त के सीमित दिनों में केंद्रित हो रही है। इसके कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, सड़क बाधित होने और फ्लैश फ्लड जैसी घटनाओं की संभावना बढ़ गई है।
पिछले वर्षों के आंकड़ों में दिखा उतार-चढ़ाव
बीते पांच वर्षों के रिकॉर्ड बताते हैं कि उत्तराखंड में मानसूनी वर्षा लगातार बदलते रुझान के साथ दर्ज हुई है। वर्ष 2021 में सामान्य से 2 प्रतिशत कम, 2022 में 5 प्रतिशत अधिक और 2023 में 18 प्रतिशत अधिक बारिश हुई। इसके बाद 2024 में वर्षा सामान्य से 12 प्रतिशत कम रही, जबकि 2025 में फिर सुधार दर्ज करते हुए सामान्य से लगभग 15 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई। इसी अवधि में हिमाचल प्रदेश में 39 प्रतिशत अतिरिक्त वर्षा, जम्मू क्षेत्र में 8 प्रतिशत अधिक, सिक्किम में 12 प्रतिशत अधिक तथा अरुणाचल प्रदेश में सामान्य से लगभग 10 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई।
केदारनाथ यात्रा के दौरान सतर्क रहने की अपील
रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन ने मानसून के दौरान केदारनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं से पूरी सावधानी बरतने का आग्रह किया है। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने कहा कि फिलहाल यात्रा सामान्य रूप से संचालित हो रही है, हालांकि मौसम को देखते हुए यात्रियों को प्रशासन की ओर से जारी सभी दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए। उन्होंने यात्रा से पहले स्वास्थ्य जांच कराने, वर्षा से बचाव के लिए आवश्यक सामान साथ रखने और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि सुरक्षा कारणों से यदि किसी स्थान पर यात्रा रोकी जाए या प्रतीक्षा करने के निर्देश दिए जाएं तो उनका पालन करना सभी यात्रियों के हित में होगा।
नदियों और संवेदनशील क्षेत्रों पर प्रशासन की लगातार नजर
मानसून के दौरान संभावित जोखिम को देखते हुए रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन ने निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया है। अधिकारियों के अनुसार जिले की प्रमुख नदियों, गाड़-गदेरों के जलस्तर और वर्षा की स्थिति पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है। संवेदनशील इलाकों की नियमित समीक्षा की जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।