Investigation – राम मंदिर चढ़ावा मामले में जांच तेज, चैट रिकॉर्ड से मिले नए सुराग
Investigation – अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी की जांच अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। मामले की जांच कर रही पुलिस ने रविवार को जेल में बंद तीन आरोपियों से करीब पांच घंटे तक पूछताछ की। जांच के दौरान मोबाइल चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस को कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन जानकारियों से पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में मदद मिल सकती है।

जेल में लंबी पूछताछ, दर्ज किए गए बयान
जांच अधिकारी और साइबर सेल की टीम ने कोर्ट की अनुमति मिलने के बाद जेल पहुंचकर अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय से विस्तृत पूछताछ की। पहले तीनों आरोपियों से अलग-अलग बातचीत की गई और बाद में उन्हें आमने-सामने बैठाकर भी सवाल पूछे गए। पूछताछ के दौरान सभी के लिखित बयान दर्ज किए गए, जिन्हें आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत में प्रस्तुत किया जाएगा।
मोबाइल चैट से सामने आए नए तथ्य
पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन से पिछले लगभग एक वर्ष का चैट रिकॉर्ड जुटाया है। शुरुआती जांच में इन चैट्स से कई ऐसे संकेत मिले हैं, जिनके आधार पर पुलिस पूरे नेटवर्क की भूमिका की जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार, बातचीत में चढ़ावे की बड़ी रकम और उसके बंटवारे को लेकर चर्चा के संकेत मिले हैं। जांच एजेंसियां इन डिजिटल साक्ष्यों का सत्यापन कर रही हैं ताकि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों की पुष्टि की जा सके।
एक अन्य आरोपी से पूछताछ की तैयारी
जांच में सामने आई नई जानकारियों के बाद पुलिस अब टिन्नू यादव से भी पूछताछ की तैयारी कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, आवश्यकता पड़ने पर अदालत से कस्टडी रिमांड की मांग की जा सकती है। जांच एजेंसियों का मानना है कि उससे पूछताछ के दौरान मामले से जुड़े कई अहम पहलुओं पर और जानकारी मिल सकती है।
रकम के बंटवारे को लेकर भी जांच
जांच के दौरान पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि आरोपियों के बीच कथित तौर पर रकम के बंटवारे को लेकर विवाद हुआ था। बताया जा रहा है कि फरवरी के दौरान हुई बातचीत में इस संबंध में कुछ संकेत मिले हैं। फिलहाल पुलिस इन चैट्स की तकनीकी जांच कर रही है और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों से उनका मिलान किया जा रहा है।
चढ़ावे की नकदी बाहर कैसे पहुंची, यही सबसे बड़ा सवाल
पूरे मामले में जांच एजेंसियों का सबसे महत्वपूर्ण फोकस इस बात पर है कि मंदिर परिसर से कथित रूप से नकदी बाहर कैसे निकाली गई। पुलिस का मानना है कि इस पहलू की गहराई से जांच किए बिना पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आ सकती। इसी कारण उन सभी लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है, जिनकी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संलिप्तता होने की आशंका है।
दस्तावेजों और प्रक्रिया की भी हो रही जांच
सूत्रों के मुताबिक, जांच टीम मंदिर में चढ़ावे की गणना और उससे जुड़े दस्तावेजी कार्यों की भी समीक्षा कर रही है। यह देखा जा रहा है कि रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया में कहीं कोई अनियमितता तो नहीं हुई। पुलिस का कहना है कि सभी उपलब्ध साक्ष्यों को कानूनी रूप से मजबूत बनाकर अदालत में पेश किया जाएगा ताकि जांच निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ सके।