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Sanctions – अमेरिकी प्रतिबंध प्रस्ताव से रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर बढ़ सकता है दबाव

Sanctions- अमेरिका में रूस के खिलाफ नए प्रतिबंधों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। चार अमेरिकी सीनेटरों ने ट्रंप प्रशासन के साथ एक समझौते की घोषणा करते हुए संकेत दिया है कि रूस से तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर सख्त कार्रवाई से जुड़ा विधेयक जल्द आगे बढ़ाया जाएगा। यदि यह कानून लागू होता है, तो रूस से ऊर्जा आयात करने वाले देशों पर इसका असर पड़ सकता है और भारत भी उन देशों में शामिल है, जिन पर इसकी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष चुनौती देखने को मिल सकती है।

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ट्रंप प्रशासन और सीनेटरों के बीच बनी सहमति

शुक्रवार को रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दलों के चार प्रभावशाली सीनेटरों ने संयुक्त बयान जारी कर बताया कि रूस से जुड़े संशोधित प्रतिबंध विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए ट्रंप प्रशासन के साथ सहमति बन गई है। इस पहल में रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और रोजर विकर के साथ डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंटल और जीन शाहीन शामिल हैं। उनका कहना है कि प्रस्तावित कानून को जल्द ही अमेरिकी कांग्रेस में पेश किया जाएगा।

रूस पर दबाव बढ़ाने की रणनीति

सीनेटरों के अनुसार, यूक्रेन संघर्ष के दौरान रूस की ओर से नागरिक इलाकों पर बढ़ते हमलों को देखते हुए आर्थिक दबाव बढ़ाना आवश्यक माना जा रहा है। उनका तर्क है कि जो देश रूसी तेल और गैस की खरीद जारी रखते हैं, वे अप्रत्यक्ष रूप से रूस की आर्थिक क्षमता को मजबूत करते हैं। इसी आधार पर ऐसे देशों के खिलाफ व्यापारिक प्रतिबंधों का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

प्रस्तावित कानून में क्या है प्रावधान

‘सैंक्शनिंग रशिया एक्ट 2025’ नामक इस प्रस्तावित विधेयक में उन देशों से अमेरिका आने वाले सामान और सेवाओं पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया था, जो रूस से तेल, प्राकृतिक गैस, यूरेनियम या अन्य पेट्रोलियम उत्पाद खरीदते हैं। शुरुआती मसौदे में 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का उल्लेख था, हालांकि अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार बाद में इसमें कुछ संशोधन किए गए हैं। संशोधित प्रावधानों का पूरा विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

राष्ट्रपति को मिल सकती है विशेष छूट देने की शक्ति

विधेयक में अमेरिकी राष्ट्रपति को राष्ट्रीय सुरक्षा या रणनीतिक हितों के आधार पर किसी देश को 180 दिनों तक राहत देने का अधिकार भी प्रस्तावित किया गया है। इससे जरूरत पड़ने पर कुछ देशों को अस्थायी छूट दी जा सकती है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि अंतिम मसौदे में यह व्यवस्था किस रूप में शामिल रहेगी।

सीनेट में व्यापक समर्थन

इस प्रस्तावित कानून को अमेरिकी सीनेट में उल्लेखनीय समर्थन प्राप्त है। जानकारी के अनुसार, 84 सीनेटर इसके सह-प्रायोजक हैं। यह विधेयक पहले भी चर्चा में रहा था, जब डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर दबाव बढ़ाने और यूक्रेन युद्ध को लेकर बातचीत आगे बढ़ाने के संदर्भ में इस पर विचार करने की बात कही थी। हालांकि लंबे समय से लंबित रहने के बाद अब इसे फिर से आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

भारत पर क्या पड़ सकता है असर

भारत रूस से कच्चे तेल का प्रमुख आयातक रहा है, इसलिए इस प्रस्तावित कानून पर नई दिल्ली की भी नजर रहेगी। जून 2025 में सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर भारत और चीन का उल्लेख करते हुए रूस से ऊर्जा खरीद जारी रखने पर चेतावनी दी थी। दूसरी ओर, अमेरिका की ओर से जारी वह सामान्य लाइसेंस, जिसके तहत कुछ परिस्थितियों में रूसी ऊर्जा खरीद की अनुमति थी, 17 जून को समाप्त हो चुका है। ऐसे में यदि नया प्रतिबंध कानून प्रभावी होता है, तो भारत सहित कई देशों के लिए ऊर्जा व्यापार और कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

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