Leptospirosis – बारिश के जलभराव में चलना बढ़ा सकता है इस बड़े संक्रमण का खतरा
Leptospirosis- मानसून के दौरान लगातार बारिश जहां मौसम को सुहाना बनाती है, वहीं कई संक्रामक बीमारियों का जोखिम भी बढ़ा देती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जलभराव वाले इलाकों, कीचड़ और दूषित पानी के संपर्क में आने से कुछ गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण हो सकते हैं। हाल ही में भारी बारिश के बाद मुंबई में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने लोगों को सलाह दी है कि खुले घाव या कटे-फटे हिस्से के साथ बारिश के पानी में चलने से बचें, क्योंकि इससे लेप्टोस्पायरोसिस जैसी बीमारी का खतरा बढ़ सकता है।

क्या है लेप्टोस्पायरोसिस
लेप्टोस्पायरोसिस एक बैक्टीरियल संक्रमण है, जो लेप्टोस्पायरा नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। यह संक्रमण आमतौर पर उस पानी या मिट्टी के संपर्क में आने से फैलता है, जो संक्रमित जानवरों के मूत्र से दूषित हो चुकी हो। चूहे, कुत्ते, मवेशी और कुछ अन्य जानवर इस बैक्टीरिया के प्रमुख वाहक माने जाते हैं। शरीर पर मौजूद छोटे घाव, खरोंच या आंख, नाक और मुंह के जरिए भी यह बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर सकता है।
जलभराव और खुले घाव बन सकते हैं बड़ा कारण
विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के बाद सड़कों पर जमा पानी हमेशा सुरक्षित नहीं होता। यदि किसी व्यक्ति के पैर या शरीर पर कट, छिलन या खुला घाव है और वह ऐसे पानी से होकर गुजरता है, तो संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ सकता है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग बारिश के मौसम में जलभराव वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह देता है।
शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें
लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण आमतौर पर संक्रमण के दो से चौदह दिनों के भीतर दिखाई दे सकते हैं। शुरुआत में तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, ठंड लगना, आंखों का लाल होना, पेट दर्द, उल्टी, मतली और दस्त जैसी शिकायतें हो सकती हैं। ये लक्षण कई बार फ्लू या डेंगू जैसे संक्रमण से मिलते-जुलते होते हैं, इसलिए समय पर चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी माना जाता है।
गंभीर स्थिति में बढ़ सकती हैं स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां
अधिकांश मामलों में समय पर इलाज मिलने से मरीज ठीक हो जाते हैं, लेकिन इलाज में देरी होने पर बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। गंभीर संक्रमण की स्थिति में त्वचा और आंखों का पीला पड़ना, किडनी से जुड़ी दिक्कतें, सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द और शरीर के भीतर रक्तस्राव जैसी जटिलताएं सामने आ सकती हैं। ऐसी स्थिति में तत्काल अस्पताल जाकर उपचार लेना आवश्यक है।
संक्रमण से बचाव के लिए अपनाएं जरूरी सावधानियां
स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बारिश के मौसम में जलभराव वाले क्षेत्रों में जाते समय बंद जूते और सुरक्षात्मक कपड़े पहनें। यदि शरीर पर कोई घाव हो तो उसे वॉटरप्रूफ ड्रेसिंग से अच्छी तरह ढककर रखें। बिना शुद्ध किए झील, नदी या नहर का पानी पीने से बचें और केवल सुरक्षित या उबला हुआ पानी ही इस्तेमाल करें। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तैराकी या वॉटर स्पोर्ट्स से भी दूरी बनाए रखना बेहतर माना जाता है। यदि किसी कारणवश दूषित पानी या कीचड़ के संपर्क में आए हों, तो 24 से 72 घंटे के भीतर डॉक्टर से सलाह लेना और जरूरत पड़ने पर बचाव संबंधी दवा लेना उपयोगी हो सकता है।