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ConsumerRights – लकी लॉकेट विवाद में ज्वेलर पर लगा 10 लाख रुपये का जुर्माना

ConsumerRights – आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम से उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति द्वारा खरीदे गए कथित “लकी लॉकेट” को लेकर उपभोक्ता आयोग ने ज्वेलर के खिलाफ सख्त फैसला सुनाया है। शिकायतकर्ता का कहना था कि समृद्धि और सफलता का दावा कर बेचा गया लॉकेट पहनने के बाद उसे आर्थिक नुकसान और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ा। मामले की सुनवाई के बाद उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इसे अनुचित व्यापार व्यवहार मानते हुए संबंधित ज्वेलर पर 10 लाख रुपये का दंड लगाया है।

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सफलता का दावा, लेकिन ग्राहक ने लगाया नुकसान का आरोप

शिकायत के अनुसार, पीड़ित ने वर्ष 2023 के अंत में ‘अदृष्ट ज्वेल्स गोल्ड एंड लकी डायमंड्स’ से लगभग 1.16 लाख रुपये में चांदी का एक विशेष लॉकेट खरीदा था। विक्रेता की ओर से दावा किया गया था कि यह लॉकेट जीवन में सकारात्मक बदलाव, आर्थिक उन्नति और सौभाग्य लेकर आएगा। ग्राहक ने बताए गए निर्देशों के अनुसार इसे धारण किया, लेकिन कुछ ही समय बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसके रियल एस्टेट कारोबार में भी लगातार गिरावट आने लगी। उसने आयोग के समक्ष कहा कि इस दौरान उसे आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक तनाव भी झेलना पड़ा।

लॉकेट हटाने के बाद उठाया कानूनी कदम

शिकायतकर्ता ने बताया कि मार्च 2024 में लॉकेट उतारने के बाद उसकी स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने लगी। इसके बाद उसने ज्वेलर को कानूनी नोटिस भेजकर धनवापसी की मांग की। निर्धारित समय में कोई जवाब नहीं मिलने पर उसने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई और भ्रामक दावों के आधार पर उत्पाद बेचने का आरोप लगाया।

ज्वेलर ने दावों को बताया आस्था और परंपरा का हिस्सा

सुनवाई के दौरान ज्वेलर ने अपने पक्ष में कहा कि ग्राहकों को रत्न उनकी जन्मपत्री और जेमोलॉजी के आधार पर सुझाए जाते हैं। कंपनी का कहना था कि लॉकेट ग्राहक की सहमति से धार्मिक विधियों और मंत्रोच्चार के बाद सौंपा गया था। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि सकारात्मक परिणामों की कोई निश्चित गारंटी नहीं दी गई थी। ज्वेलर ने यह तर्क भी रखा कि व्यापार या व्यक्तिगत जीवन में आने वाली हर समस्या के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

आयोग ने भ्रामक प्रचार पर जताई सख्त आपत्ति

मामले की सुनवाई करने वाली पीठ ने ज्वेलर की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने कहा कि धार्मिक विश्वास या परंपराओं का सहारा लेकर किसी उत्पाद के निश्चित लाभ का संकेत देना उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकता है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि उत्पाद से जुड़ी महत्वपूर्ण शर्तें अत्यंत छोटे अक्षरों में लिखी गई थीं, जिससे सामान्य ग्राहक उन्हें आसानी से पढ़ या समझ नहीं सकता था। आयोग ने ऐसे प्रचार को अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में माना।

ग्राहक को रिफंड और मुआवजा देने का आदेश

उपभोक्ता आयोग ने ज्वेलर को लॉकेट की पूरी कीमत 1.16 लाख रुपये लौटाने का निर्देश दिया। इसके अलावा मानसिक पीड़ा के लिए 51 हजार रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 10 हजार रुपये देने का आदेश भी जारी किया गया। आयोग ने अनुचित व्यापारिक गतिविधियों को रोकने के उद्देश्य से 10 लाख रुपये का दंड भी लगाया है। आदेश का समय पर पालन नहीं होने की स्थिति में निर्धारित ब्याज भी देना होगा।

उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण संदेश

यह फैसला इस बात की याद दिलाता है कि किसी भी उत्पाद के प्रचार में किए गए दावे तथ्यात्मक और पारदर्शी होने चाहिए। यदि कोई विक्रेता ऐसे वादे करता है जिनका स्पष्ट आधार नहीं है या आवश्यक जानकारी छिपाता है, तो उपभोक्ता कानून के तहत उसके खिलाफ शिकायत की जा सकती है। ऐसे मामलों में उपभोक्ता अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संबंधित उपभोक्ता आयोग या राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन की सहायता ले सकते हैं।

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