RSS – एसवाई कुरैशी ने बताए मोहन भागवत संग हुई बैठक के अहम पहलू
RSS – पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के साथ वर्ष 2022 में हुई मुलाकात को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें साझा की हैं। अपनी नई पुस्तक के प्रकाशन से पहले दिए गए एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि इस बैठक में सांप्रदायिक सौहार्द, नफरत फैलाने वाले बयानों, संविधान और हिंदू-मुस्लिम संबंधों जैसे कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई थी। कुरैशी के अनुसार, बातचीत के दौरान मोहन भागवत ने कहा था कि मुसलमानों के बिना हिंदू राष्ट्र की कल्पना संभव नहीं है।

प्रतिनिधिमंडल ने स्वयं मांगा था मिलने का समय
एसवाई कुरैशी ने बताया कि यह मुलाकात संघ प्रमुख की पहल पर नहीं, बल्कि उनके प्रतिनिधिमंडल के अनुरोध पर हुई थी। उन्होंने कहा कि समय मांगने के कुछ सप्ताह बाद दिल्ली में बैठक तय हुई। इस प्रतिनिधिमंडल में पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, वरिष्ठ पत्रकार शाहिद सिद्दीकी, उद्योगपति सईद शेरवानी और सेना के पूर्व उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) जमीर उद्दीन शाह भी शामिल थे। बैठक का उद्देश्य देश में बढ़ते सामाजिक तनाव और संवाद की संभावनाओं पर चर्चा करना था।
हेट स्पीच और सामाजिक माहौल पर हुई बातचीत
कुरैशी ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने बैठक के दौरान देश में बढ़ रही हेट स्पीच, भीड़ हिंसा और सामाजिक ध्रुवीकरण जैसे मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने इस बात की आलोचना की थी कि सरकार के बजाय RSS नेतृत्व से बातचीत क्यों की गई। इस पर उनका जवाब था कि उन्होंने उन पक्षों से सीधे संवाद करना उचित समझा, जिन्हें वे सार्वजनिक विमर्श में प्रभावशाली मानते थे। उनका उद्देश्य आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि संवाद के माध्यम से समाधान तलाशना था।
संविधान और हिंदू राष्ट्र पर क्या हुई चर्चा
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त के अनुसार, बातचीत के दौरान उन्होंने मोहन भागवत से पूछा कि यदि हिंदू राष्ट्र की अवधारणा है तो उसमें मुसलमानों की भूमिका क्या होगी। कुरैशी का दावा है कि भागवत ने जवाब दिया कि भारत की कल्पना मुसलमानों के बिना अधूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान को बदलने की कोई योजना नहीं है और देश की व्यवस्था उसी संवैधानिक ढांचे के भीतर आगे बढ़नी चाहिए। कुरैशी ने इन बातों का उल्लेख अपनी पुस्तक में भी किया है।
दोनों पक्षों ने रखे अपने-अपने मुद्दे
कुरैशी के मुताबिक, बैठक में संघ प्रमुख ने गोहत्या, बीफ सेवन और “काफिर” शब्द के इस्तेमाल जैसे विषयों पर हिंदू समाज की चिंताओं का जिक्र किया। इस पर प्रतिनिधिमंडल ने अपनी राय रखते हुए कहा कि यदि किसी शब्द या व्यवहार से दूसरे समुदाय की भावनाएं आहत होती हैं तो उससे बचने का प्रयास किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह मुद्दा भी उठाया कि मुसलमानों के लिए सार्वजनिक रूप से “पाकिस्तानी” या “जिहादी” जैसे शब्दों का प्रयोग भी अनुचित है। कुरैशी के अनुसार, मोहन भागवत ने इस चिंता से सहमति जताई और ऐसे संबोधनों से बचने की आवश्यकता पर जोर दिया।
संवाद को बताया स्थायी समाधान का माध्यम
एसवाई कुरैशी ने कहा कि वर्ष 2022 की उस मुलाकात के बाद उनकी मोहन भागवत से कई और बैठकें हुईं। उनके अनुसार, हर बातचीत में संविधान के महत्व, सामाजिक सद्भाव और विभिन्न समुदायों के बीच भरोसा मजबूत करने पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि लंबे समय से चले आ रहे सामाजिक मतभेदों का समाधान केवल निरंतर संवाद, धैर्य और पारस्परिक सम्मान के जरिए ही संभव है।