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RajyaSabha – मानसून सत्र से पहले बदला सियासी समीकरण, TMC को लगा नया झटका

RajyaSabha- संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने से पहले राज्यसभा की राजनीतिक तस्वीर तेजी से बदलती नजर आ रही है। तृणमूल कांग्रेस की ओर से लगातार हो रहे इस्तीफों के बीच अब पार्टी की सांसद रुक्मिणी मलिक, जिन्हें कोयल मलिक के नाम से भी जाना जाता है, ने भी राज्यसभा की सदस्यता छोड़ दी है। उनके इस्तीफे के साथ ही उच्च सदन में दलों के संख्याबल को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

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तृणमूल से लगातार बढ़ रहे इस्तीफे

रुक्मिणी मलिक से पहले सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाईक भी राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं। इन नेताओं में से तीन पहले ही भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो चुके हैं। भाजपा ने उन्हें 24 जुलाई को पश्चिम बंगाल से होने वाले राज्यसभा उपचुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया है। विधानसभा में मौजूदा संख्या बल को देखते हुए उनकी जीत की संभावना मजबूत मानी जा रही है।

भाजपा नेताओं से मुलाकात के बाद बढ़ीं अटकलें

इस्तीफा देने के बाद रुक्मिणी मलिक की भाजपा के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र यादव से मुलाकात ने उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर चर्चाओं को और तेज कर दिया है। हालांकि उन्होंने अपने भविष्य को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई घोषणा नहीं की है, लेकिन राजनीतिक हलकों में उनके भाजपा या किसी नए राजनीतिक समूह के साथ जुड़ने की संभावनाओं पर चर्चा जारी है।

महज 105 दिन रहीं राज्यसभा सदस्य

रुक्मिणी मलिक इसी वर्ष 3 अप्रैल को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुई थीं। सदस्य बनने के लगभग 105 दिन बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उपलब्ध संसदीय रिकॉर्ड के अनुसार, इस अवधि में उन्होंने सदन की कार्यवाही में भाग नहीं लिया। कम समय तक सांसद रहने के कारण उनका कार्यकाल भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

एनडीए के संख्याबल पर पड़ सकता है असर

हालिया घटनाक्रम का सीधा प्रभाव राज्यसभा के संख्याबल पर पड़ सकता है। भाजपा के सहयोगी दलों में टीडीपी, एआईएडीएमके, जदयू, एनसीपी, शिवसेना, यूपीपीएल सहित अन्य क्षेत्रीय दल शामिल हैं। इन दलों के समर्थन के साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का आंकड़ा पहले से अधिक मजबूत स्थिति में पहुंचता दिखाई दे रहा है। यदि उपचुनाव के नतीजे अनुमान के अनुरूप रहते हैं, तो भाजपा का राज्यसभा में अपना अब तक का सबसे बड़ा संख्याबल दर्ज हो सकता है।

मानसून सत्र से पहले रणनीति पर फोकस

संसद के आगामी सत्र को देखते हुए सरकार और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उच्च सदन में संख्या संतुलन का असर विधायी कार्यवाही और महत्वपूर्ण विधेयकों पर पड़ सकता है। इसी वजह से राज्यसभा में हो रहे हर बदलाव पर सभी दलों की नजर बनी हुई है।

लोकसभा में भी बदली राजनीतिक स्थिति

तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनौतियां केवल राज्यसभा तक सीमित नहीं हैं। लोकसभा में भी पार्टी के कई नेताओं के अलग होने के बाद उसकी संख्या पहले की तुलना में कम हो गई है। नए राजनीतिक समीकरण बनने के साथ विभिन्न दलों के बीच समर्थन और गठबंधन को लेकर भी अटकलों का दौर जारी है। हालांकि इन संभावित बदलावों पर संबंधित दलों की ओर से आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।

ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने इस्तीफों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिन लोगों पर किसी प्रकार का दबाव है, वे अपनी इच्छा के अनुसार निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं। उन्होंने रुक्मिणी मलिक के कलाकार के रूप में योगदान की सराहना करते हुए राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के लिए उनका धन्यवाद भी किया।

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