राष्ट्रीय

Delimitation – संविधान संशोधन विधेयक पर सरकार के लिए बढ़ता दिख रहा है समर्थन

Delimitation– लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण और वर्ष 2029 से महिला आरक्षण व्यवस्था लागू करने से जुड़े प्रस्तावित संविधान संशोधन विधेयक को लेकर केंद्र सरकार के पक्ष में राजनीतिक परिस्थितियां पहले की तुलना में अधिक अनुकूल होती दिखाई दे रही हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि कुछ प्रमुख विपक्षी दल, जिन्होंने पहले इस प्रस्ताव पर आपत्तियां जताई थीं, अब अपने रुख में नरमी के संकेत दे रहे हैं। इससे विधेयक को लेकर आगे की संसदीय रणनीति पर भी नई संभावनाएं बनती नजर आ रही हैं।

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कुछ विपक्षी दलों के रुख में बदलाव के संकेत

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP (SP) की ओर से इस मुद्दे पर पहले जैसी कड़ी आपत्ति दिखाई नहीं दे रही है। माना जा रहा है कि सरकार और इन दलों के बीच प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों पर हुई चर्चाओं के बाद संवाद की स्थिति बेहतर हुई है। इसी बीच पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र की हालिया राजनीतिक घटनाओं ने भी संसदीय समीकरणों को प्रभावित किया है।

प्रतिनिधित्व बढ़ाने का प्रस्ताव बना चर्चा का विषय

बताया जा रहा है कि सरकार उन राज्यों की चिंताओं को दूर करने के लिए विधेयक में कुछ स्पष्ट प्रावधान जोड़ने पर विचार कर रही है, जिनकी ओर से परिसीमन के बाद प्रतिनिधित्व प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी। सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा में राज्यों के प्रतिनिधित्व को लेकर पहले दिए गए आश्वासनों को इस बार विधेयक के मसौदे में शामिल किया जा सकता है। माना जा रहा है कि इससे कई दलों का भरोसा मजबूत हो सकता है।

कांग्रेस और DMK के बीच बढ़ी राजनीतिक दूरी

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस मुद्दे पर कांग्रेस और DMK के बीच मतभेद खुलकर सामने आए हैं। DMK से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पार्टी अब किसी भी राष्ट्रीय सहयोगी दल के रुख का स्वतः समर्थन नहीं करेगी, बल्कि अपने राज्य और क्षेत्रीय हितों को प्राथमिकता देगी। पार्टी ने यह भी संकेत दिया है कि यदि उसकी प्रमुख चिंताओं का समाधान किया जाता है, तो वह अपने निर्णय पर स्वतंत्र रूप से विचार करेगी।

पुराने राजनीतिक अनुभवों का भी हुआ जिक्र

DMK से जुड़े नेताओं ने अपने हालिया बयानों में अतीत के राजनीतिक घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि गठबंधन की राजनीति में विश्वास और पारदर्शिता अहम होती है। पार्टी का कहना है कि वह भविष्य में किसी भी बड़े संवैधानिक फैसले पर अपना रुख राज्य के हितों और उपलब्ध प्रस्तावों के आधार पर तय करेगी। इसलिए इस बार उसका निर्णय पहले की तुलना में अलग हो सकता है।

सरकार फिलहाल कर रही है उचित समय का इंतजार

केंद्र सरकार ने अभी तक इस संविधान संशोधन विधेयक को दोबारा संसद में पेश करने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। हालांकि, सरकारी सूत्रों का कहना है कि जब आवश्यक संख्या बल पूरी तरह सुनिश्चित हो जाएगा, तब विधेयक को सदन में लाने पर फैसला लिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य व्यापक राजनीतिक सहमति के साथ आगे बढ़ने का बताया जा रहा है।

पिछली बार भी मिला था उल्लेखनीय समर्थन

संसदीय रिकॉर्ड के अनुसार, इस प्रस्ताव को पिछली बार लोकसभा में बड़ी संख्या में सांसदों का समर्थन मिला था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कुछ प्रमुख विपक्षी दलों का रुख वास्तव में बदलता है, तो सरकार के लिए आवश्यक समर्थन जुटाना पहले की तुलना में अधिक आसान हो सकता है। हालांकि अंतिम स्थिति विधेयक पेश होने और सदन में होने वाली चर्चा के बाद ही स्पष्ट होगी।

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