FactoryRegistration – बिहार में लागू हुए नए कारखानों के पंजीकरण शुल्क और नियम
FactoryRegistration- बिहार सरकार ने राज्य में नए कारखानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के पंजीकरण के लिए नई शुल्क व्यवस्था लागू कर दी है। श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग की ओर से जारी नई नियमावली के तहत निर्धारित समयसीमा के भीतर आवेदन करने पर कम शुल्क देना होगा, जबकि देरी से पंजीकरण कराने वाले संचालकों को कई गुना अधिक शुल्क चुकाना पड़ेगा। विभाग ने न्यूनतम 500 रुपये और अधिकतम 80 हजार रुपये तक का पंजीकरण शुल्क निर्धारित किया है।

समय पर आवेदन करने पर मिलेगी राहत
नई व्यवस्था के अनुसार, निर्धारित अवधि के भीतर ऑनलाइन आवेदन करने वाले कारोबारियों को अपेक्षाकृत कम शुल्क देना होगा। वहीं, समयसीमा बीतने के बाद आवेदन करने पर शुल्क चरणबद्ध तरीके से बढ़ेगा। विभाग का उद्देश्य नए और पहले से संचालित प्रतिष्ठानों का समय पर पंजीकरण सुनिश्चित करना है, ताकि श्रम एवं सुरक्षा से जुड़े नियमों का प्रभावी पालन हो सके।
ऑनलाइन प्रक्रिया से होगा पंजीकरण
विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी आवेदन ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। यदि आवेदन पूरी तरह सही पाया जाता है तो पंजीकरण प्रमाणपत्र शीघ्र जारी कर दिया जाएगा। किसी प्रकार की त्रुटि होने पर संबंधित आवेदक से सात दिनों के भीतर संपर्क कर आवश्यक सुधार कराने का अवसर दिया जाएगा। नियमावली में यह भी कहा गया है कि केवल औपचारिक या मामूली कारणों के आधार पर आवेदन निरस्त नहीं किया जाएगा और पंजीयन अधिकारी प्रक्रिया को सरल बनाने में सहयोग करेगा।
पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रदर्शित करना होगा
नई व्यवस्था के तहत जारी होने वाला पंजीकरण प्रमाणपत्र हस्तांतरणीय नहीं होगा। सभी संचालकों को इसे अपने प्रतिष्ठान या कारखाने में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। पहले से पंजीकृत नियोक्ताओं को भी ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी अद्यतन जानकारी उपलब्ध करानी होगी। यदि किसी ने गलत जानकारी देकर पंजीकरण प्राप्त किया है तो विभाग उसे रद्द करने का अधिकार रखेगा। वहीं, व्यवसाय बंद होने की स्थिति में ऑनलाइन माध्यम से पंजीकरण निरस्त कराने का भी प्रावधान किया गया है।
कर्मचारियों की संख्या के आधार पर तय होगा शुल्क
नियमावली में कर्मचारियों की संख्या के अनुसार अलग-अलग पंजीकरण शुल्क निर्धारित किया गया है। 10 से 49 कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों के लिए समय पर आवेदन करने पर 500 रुपये शुल्क रखा गया है, जबकि देरी होने पर यह बढ़कर 10 हजार रुपये तक पहुंच सकता है। इसी तरह 50 से 100, 101 से 300, 301 से 500, 501 से 1000 और 1001 से 5000 कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों के लिए भी अलग-अलग शुल्क तय किया गया है। निर्धारित अवधि के बाद आवेदन करने पर संबंधित श्रेणी के अनुसार शुल्क कई गुना तक बढ़ जाएगा।
नई नियमावली के तहत होगा संचालन
श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग ने यह व्यवस्था “उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा संहिता नियमावली 2026” के तहत लागू की है। यह नियम खुदरा और थोक व्यापार सहित संबंधित प्रतिष्ठानों पर भी लागू होंगे। विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य पंजीकरण प्रक्रिया को पारदर्शी, डिजिटल और अधिक व्यवस्थित बनाना है, ताकि उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को एक समान प्रशासनिक सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।