SupremeCourt – भीमा कोरेगांव मामले की सुनवाई से अलग हुए जस्टिस चंद्रशेखर
SupremeCourt– भीमा कोरेगांव मामले में आरोपी अधिवक्ता सुरेंद्र गाडलिंग की जमानत याचिका पर सुनवाई मंगलवार को निर्धारित थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू होने से पहले ही पीठ के सदस्य न्यायमूर्ति चंद्रशेखर ने स्वयं को इस मामले से अलग कर लिया। इसके बाद यह स्पष्ट किया गया कि अब याचिका किसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध की जाएगी।

सुनवाई के दौरान दी गई जानकारी
मामला न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति चंद्रशेखर की खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध था। जब सुनवाई शुरू हुई तो न्यायमूर्ति मिश्रा ने बताया कि उनके साथ बैठे न्यायाधीश ने इस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि अब इस याचिका को किसी दूसरी पीठ के समक्ष भेजा जाएगा। हालांकि, न्यायमूर्ति चंद्रशेखर ने स्वयं को अलग करने का कारण सार्वजनिक रूप से नहीं बताया।
तीसरे न्यायाधीश ने भी बनाई दूरी
इस मामले में यह पहली बार नहीं है जब किसी न्यायाधीश ने सुनवाई से स्वयं को अलग किया हो। इससे पहले न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर भी इस प्रकरण की सुनवाई से अलग हो चुके हैं। लगातार तीसरे न्यायाधीश के अलग होने के बाद अब गाडलिंग की जमानत याचिका नई पीठ के समक्ष सूचीबद्ध की जाएगी।
कपिल सिब्बल ने की थी जल्द सुनवाई की मांग
पिछले सप्ताह वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने, जो सुरेंद्र गाडलिंग की ओर से पेश हुए थे, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया था। उन्होंने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल पिछले साढ़े सात वर्षों से जेल में हैं और जमानत याचिका पर शीघ्र सुनवाई की आवश्यकता है। इसके बाद मामले को सूचीबद्ध किया गया था, लेकिन अब सुनवाई फिर आगे बढ़ गई है।
कॉलेजियम व्यवस्था पर सीजेआई की टिप्पणी
इसी दिन मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया को लेकर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की कई बार बिना पूरी जानकारी के आलोचना की जाती है। उनके अनुसार, जो लोग न्यायिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली से पूरी तरह परिचित नहीं होते, वे अक्सर सतही आधार पर टिप्पणियां कर देते हैं।
नियुक्तियों में कई पहलुओं पर होता है विचार
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति या पदोन्नति के लिए नामों पर विचार करते समय कॉलेजियम कई महत्वपूर्ण मानकों को ध्यान में रखता है। इनमें संबंधित न्यायाधीश का प्रदर्शन, न्यायिक अनुभव, पूर्व में निभाई गई जिम्मेदारियां और उनका पेशेवर रिकॉर्ड शामिल होता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सिफारिश विस्तृत मूल्यांकन के बाद ही की जाती है। यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट में हाल ही में नियुक्त हुए नए न्यायाधीशों के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान की गई।