Diplomacy – ट्रंप ने फिर दोहराया भारत-पाक संघर्ष रोकने का दावा, भारत का रुख पहले जैसा
Diplomacy– अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले वर्ष हुए सैन्य तनाव को लेकर दावा किया है कि उनकी सरकार की पहल से दोनों देशों के बीच संघर्ष आगे नहीं बढ़ा। वॉशिंगटन के निकट कैंप डेविड में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि उस समय अमेरिका ने दोनों देशों को स्पष्ट संदेश दिया था कि यदि सैन्य टकराव जारी रहा तो उन पर भारी आयात शुल्क लगाया जा सकता है। उनके अनुसार, इसके बाद दोनों देशों ने तनाव कम करने का फैसला किया।

सैन्य कार्रवाई को लेकर ट्रंप का दावा
बातचीत के दौरान ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष में 11 विमान मार गिराए गए थे। हालांकि भारत पहले भी इस दावे का खंडन कर चुका है और आधिकारिक स्तर पर इसे सही नहीं माना गया है। ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि उस समय हालात बेहद गंभीर थे और स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए आर्थिक दबाव का विकल्प अपनाया गया।
शुल्क की चेतावनी का किया उल्लेख
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने दोनों देशों से स्पष्ट रूप से कहा था कि यदि सैन्य कार्रवाई जारी रहती है तो अमेरिका की ओर से लगभग 250 प्रतिशत तक शुल्क लगाया जा सकता है। ट्रंप के मुताबिक, इस चेतावनी के बाद दोनों पक्षों ने नाराजगी जताई, लेकिन अगले ही दिन संपर्क कर यह भरोसा दिया कि वे युद्ध को आगे नहीं बढ़ाएंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को शांत कराने में भूमिका निभाई।
पाकिस्तान का भी किया जिक्र
ट्रंप ने अपने बयान में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने उनसे बातचीत में कहा था कि दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच तनाव कम होने से बड़ी संख्या में लोगों की जान बची। हालांकि इस दावे पर पाकिस्तान की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
भारत ने दोहराया अपना आधिकारिक रुख
भारत सरकार पहले भी कई अवसरों पर स्पष्ट कर चुकी है कि संघर्ष विराम का निर्णय दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच सीधे संपर्क के बाद हुआ था। नई दिल्ली का लगातार यही कहना रहा है कि इस प्रक्रिया में किसी तीसरे देश की मध्यस्थता नहीं हुई। भारत ने ट्रंप के पूर्व के ऐसे दावों का भी इसी आधार पर खंडन किया था।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ा था तनाव
भारत ने पिछले वर्ष पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद सात से 10 मई के बीच ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया था। इस अभियान के दौरान पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में स्थित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बढ़ा था। भारतीय अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान की ओर से की गई जवाबी कोशिशों को भारतीय सुरक्षा बलों ने विफल कर दिया था।
आधिकारिक बयानों पर टिकी निगाहें
ट्रंप के ताजा बयान के बाद एक बार फिर इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि भारत का आधिकारिक रुख पहले की तरह स्पष्ट है कि संघर्ष विराम दोनों देशों के बीच सैन्य स्तर पर हुई बातचीत का परिणाम था। ऐसे मामलों में विभिन्न देशों के नेताओं के बयानों और आधिकारिक पक्ष के बीच अंतर को देखते हुए अंतिम निष्कर्ष संबंधित सरकारी वक्तव्यों के आधार पर ही माना जाता है।