BloodPressure – घर पर बीपी मापते समय जरूरी है कफ लगाने की सही विधि जानना
BloodPressure – उच्च या निम्न रक्तचाप की निगरानी के लिए आजकल बड़ी संख्या में लोग घर पर डिजिटल बीपी मॉनिटर का उपयोग करते हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मशीन का कफ सही तरीके से नहीं लगाया जाता, तो ब्लड प्रेशर की रीडिंग वास्तविक स्तर से अलग आ सकती है। ऐसे में उपचार या स्वास्थ्य संबंधी निर्णय भी प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए बीपी मापने के दौरान सही तकनीक अपनाना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

कफ का मध्य भाग हृदय की ऊंचाई के बराबर रखें
डॉ. कीर्ति शर्मा के अनुसार, ब्लड प्रेशर मापते समय कफ का मध्य भाग हृदय के स्तर के बराबर होना चाहिए। यदि कफ हृदय से अधिक ऊपर या नीचे की स्थिति में रहता है, तो मशीन द्वारा दर्ज की गई रीडिंग पूरी तरह सटीक नहीं हो सकती। विशेषज्ञों का मानना है कि सही परिणाम के लिए बैठने की मुद्रा और हाथ की स्थिति भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है जितनी मशीन की गुणवत्ता।
आर्टरी मार्क की दिशा का रखें विशेष ध्यान
अधिकांश डिजिटल बीपी मॉनिटर के कफ पर एक तीर का निशान बना होता है, जिसे आर्टरी मार्क कहा जाता है। यह निशान बांह के अंदरूनी हिस्से में मुख्य रक्तवाहिनी की दिशा में होना चाहिए। यदि कफ को उल्टी दिशा में या गलत स्थान पर बांधा जाता है, तो रक्त प्रवाह का सही आकलन नहीं हो पाता और माप में अंतर आ सकता है।
कोहनी से उचित दूरी पर बांधें कफ
विशेषज्ञों के अनुसार, कफ का निचला किनारा कोहनी के मोड़ से लगभग दो अंगुल या करीब 2.5 सेंटीमीटर ऊपर होना चाहिए। इससे कफ सही स्थान पर फिट रहता है और मशीन रक्तचाप को बेहतर तरीके से माप पाती है। कफ न तो बहुत ढीला होना चाहिए और न ही जरूरत से ज्यादा कसा हुआ, क्योंकि दोनों स्थितियां रीडिंग को प्रभावित कर सकती हैं।
सटीक रीडिंग के लिए इन बातों का भी रखें ध्यान
ब्लड प्रेशर मापने से पहले कम से कम पांच मिनट तक आराम की स्थिति में बैठना चाहिए। माप के दौरान पैर जमीन पर सीधे टिके हों, पीठ कुर्सी से सटी हो और बातचीत से बचना चाहिए। चाय, कॉफी, धूम्रपान या भारी शारीरिक गतिविधि के तुरंत बाद बीपी जांचने से भी रीडिंग प्रभावित हो सकती है। यदि लगातार असामान्य परिणाम मिल रहे हों, तो केवल घरेलू मशीन पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सही तकनीक के साथ नियमित निगरानी से ब्लड प्रेशर को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है और समय पर चिकित्सा सलाह लेने में भी सुविधा होती है।