US India Tariff Dispute: ट्रंप के खिलाफ US में छिड़ी बगावत, भारत पर 50% टैरिफ खत्म करने के लिए तीन अमेरिकी सांसदों ने संसद में डाला प्रस्ताव
US India Tariff Dispute: अमेरिका की प्रतिनिधि सभा में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत से आयातित वस्तुओं पर लगाए गए भारी टैरिफ के खिलाफ एक अहम पहल सामने आई है। तीन अमेरिकी सांसदों ने इन शुल्कों को समाप्त करने के उद्देश्य से एक प्रस्ताव पेश किया है। उनका तर्क है कि ये टैरिफ न सिर्फ अवैध हैं, बल्कि अमेरिका के श्रमिकों, उपभोक्ताओं और भारत-अमेरिका रिश्तों के लिए भी नुकसानदेह साबित हो रहे हैं (trade-policy)।

किन सांसदों ने रखा प्रस्ताव
यह प्रस्ताव कांग्रेसवुमन डेबोरा रॉस, कांग्रेसी मार्क वेसी और भारतीय-अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति द्वारा लाया गया है। इन तीनों नेताओं का मानना है कि राष्ट्रपति द्वारा एकतरफा तरीके से लगाए गए आयात शुल्क संविधान की भावना के खिलाफ हैं। यह पहल केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक व्यापार संतुलन को लेकर उठाए जा रहे सवालों का भी हिस्सा मानी जा रही है (Congress-proposal)।
सीनेट के द्विदलीय कदम से जुड़ा मामला
प्रतिनिधि सभा में पेश यह प्रस्ताव सीनेट में पहले से मौजूद एक द्विदलीय उपाय के अनुरूप है। उस प्रस्ताव का उद्देश्य ब्राजील पर लगाए गए समान टैरिफ को खत्म करना और आयात शुल्क बढ़ाने के लिए राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों को सीमित करना है। इससे साफ है कि अमेरिकी संसद में ट्रंप की व्यापार नीतियों को लेकर असहमति बढ़ रही है (bipartisan-effort)।
IEEPA के तहत लगाए गए अतिरिक्त शुल्क
बयान के अनुसार, इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम यानी IEEPA के तहत भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क को रद्द करना है। ये शुल्क 27 अगस्त 2025 को लगाए गए थे और पहले से मौजूद टैरिफ के ऊपर जोड़े गए थे, जिससे कुल शुल्क 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था (IEEPA-act)।
भारतीय उत्पादों पर बढ़ा बोझ
ट्रंप प्रशासन ने कई भारतीय मूल के उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाकर अमेरिकी बाजार में उनकी कीमतें काफी ज्यादा कर दी थीं। इसका सीधा असर अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ा, जिन्हें रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तुएं महंगे दामों पर खरीदनी पड़ीं। सांसदों का कहना है कि इस नीति से घरेलू उद्योग को अपेक्षित लाभ नहीं मिला, उल्टा नुकसान ही हुआ (import-duties)।
नॉर्थ कैरोलिना और भारत का गहरा रिश्ता
कांग्रेसवुमन डेबोरा रॉस ने बताया कि नॉर्थ कैरोलिना की अर्थव्यवस्था भारत से गहराई से जुड़ी हुई है। भारतीय कंपनियों ने राज्य में एक अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है, जिससे जीवन विज्ञान और तकनीक जैसे क्षेत्रों में हजारों नौकरियां पैदा हुई हैं। ऐसे में टैरिफ से इस सहयोग को खतरा पैदा हो गया है (economic-ties)।
टेक्सास के उपभोक्ताओं पर असर
कांग्रेसी मार्क वेसी ने कहा कि ये टैरिफ उत्तर टेक्सास के आम नागरिकों पर अतिरिक्त कर की तरह हैं। पहले से ही बढ़ती महंगाई से जूझ रहे लोगों के लिए यह बोझ और बढ़ गया है। उन्होंने भारत को अमेरिका का एक अहम सांस्कृतिक, आर्थिक और रणनीतिक साझेदार बताते हुए इन शुल्कों को तुरंत हटाने की मांग की (consumer-impact)।
राजा कृष्णमूर्ति की कड़ी प्रतिक्रिया
भारतीय-अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने टैरिफ को प्रतिउत्पादक करार दिया। उनके अनुसार, इनसे आपूर्ति श्रृंखलाएं बाधित होती हैं, अमेरिकी श्रमिकों को नुकसान पहुंचता है और उपभोक्ताओं के लिए लागत बढ़ती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि टैरिफ हटाने से भारत-अमेरिका आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को नई मजबूती मिलेगी (supply-chain)।
डेमोक्रेट्स की व्यापक रणनीति
यह प्रस्ताव डेमोक्रेटिक पार्टी द्वारा ट्रंप के एकतरफा व्यापार फैसलों को चुनौती देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। अक्टूबर में भी इन्हीं सांसदों ने 19 अन्य प्रतिनिधियों के साथ राष्ट्रपति से टैरिफ नीति पर पुनर्विचार करने की अपील की थी। उनका मकसद भारत के साथ बिगड़ते रिश्तों को फिर से पटरी पर लाना है (bilateral-relations)।
टैरिफ बढ़ाने की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि ट्रंप ने 1 अगस्त से भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था और कुछ ही दिनों बाद इसमें 25 प्रतिशत की और वृद्धि कर दी गई थी। इसके पीछे उन्होंने भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद का हवाला दिया था। अब इस नीति पर संसद में खुली चुनौती अमेरिका की व्यापार दिशा में बड़े बदलाव का संकेत दे रही है (US-India-relations)।



