BMW Accident Case: मुंबई BMW हिट एंड रन केस में सुप्रीम कोर्ट सख्त, आरोपी मिहिर शाह को जमानत से मिली साफ इनकार
BMW Accident Case: मामले की सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ए.जी. मसीह की पीठ ने की। बॉम्बे हाईकोर्ट के 21 नवंबर के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान पीठ ने आरोपी के व्यवहार पर कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने कहा कि आरोपी देर रात लग्जरी कारों का इस्तेमाल करता है, लापरवाही से वाहन चलाता है और हादसे के बाद मौके से फरार हो जाता है। इस तरह की हरकतें समाज के लिए बेहद खतरनाक हैं और ऐसे लोगों को जेल में ही रहना चाहिए।

संपन्न पृष्ठभूमि पर भी उठे सवाल
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी नोट किया कि मिहिर शाह एक संपन्न परिवार से आता है। उसके पिता राजेश शाह व्यवसायी हैं और महाराष्ट्र की राजनीति में सक्रिय रह चुके हैं। अदालत ने संकेत दिया कि आर्थिक और सामाजिक रसूख के बावजूद कानून से ऊपर कोई नहीं है और ऐसे मामलों में सख्ती जरूरी है, ताकि गलत संदेश न जाए।
बचाव पक्ष की दलील और याचिका वापसी
आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने अदालत में यह स्वीकार किया कि इस मामले के तथ्य परेशान करने वाले हैं। उन्होंने यह भी बताया कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रमुख गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद ही दोबारा जमानत के लिए आवेदन करने की छूट दी थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुझाव दिया कि मौजूदा स्थिति में याचिका वापस लेना बेहतर होगा। इसके बाद अदालत ने जमानत याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।
पूरा मामला क्या है
नाखवा पुलिस के अनुसार, जुलाई 2024 में मिहिर शाह मुंबई के वर्ली सी-फेस रोड पर तेज रफ्तार BMW कार चला रहा था। इसी दौरान उसकी गाड़ी एक स्कूटर सवार दंपत्ति से टकरा गई। टक्कर के बाद भी कार नहीं रुकी और आरोपी कथित रूप से वाहन चलाता रहा। हादसे में स्कूटर चला रहे पति सड़क पर गिर गए, जबकि उनकी पत्नी कार के साथ करीब दो किलोमीटर तक घिसटती चली गई। गंभीर चोटों के कारण महिला की मौके पर ही मौत हो गई।
जांच में सामने आए अहम तथ्य
पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि कार मिहिर शाह ही चला रहा था। हालांकि, शुरुआती दौर में परिवार ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए कार में मौजूद ड्राइवर को दोषी ठहराने की कोशिश की। पुलिस ने घटना के दो दिन बाद मिहिर शाह को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपराध की गंभीरता, आरोपी के आचरण और समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। यहां भी अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि इस तरह के मामलों में नरमी बरतना उचित नहीं है। अदालत का मानना है कि सड़क सुरक्षा और आम नागरिकों की जान की कीमत पर किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
लागू कानून और संभावित सजा
गौरतलब है कि मिहिर शाह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के तहत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। इनमें ऐसी धारा शामिल है, जिसके तहत दोष सिद्ध होने पर अधिकतम सजा आजीवन कारावास तक हो सकती है। फिलहाल आरोपी न्यायिक हिरासत में है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।



