India Bangladesh Tension: भारत विरोधी साजिशों पर अगरतला से ढाका तक छिड़ चुका है महासंग्राम
India Bangladesh Tension: बांग्लादेश के राजनीतिक गलियारों में उस समय हड़कंप मच गया जब भारत के खिलाफ जहर उगलने वाले और ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ का विवादित ख्वाब देखने वाले शरीफ उस्मान हादी की मौत हो गई। इस कट्टरपंथी नेता के दुनिया से जाने के बाद पड़ोसी देश में एक बार फिर अराजकता, हिंसा और आगजनी का दौर लौट आया है। इस अशांति के बीच (anti India protest) का स्वर सबसे तेज सुनाई दे रहा है, जो दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों के लिए एक गंभीर चेतावनी है। चटगांव में भारतीय उच्चायोग के बाहर की गई नारेबाजी यह साफ करती है कि वहां की हवाओं में नफरत घोली जा रही है।

त्रिपुरा की धरती से उठी विरोध की बुलंद आवाज
बांग्लादेश में जारी भारत विरोधी अभियान की गूँज अब भारत के सीमावर्ती राज्यों में भी स्पष्ट सुनाई दे रही है। त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में टिपरा मोथा पार्टी की युवा शाखा ने बांग्लादेशी नेताओं की बदजुबानी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। युवा टिपरा महासंघ के कार्यकर्ताओं ने (diplomatic mission) के पास इकट्ठा होकर अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की। इस विरोध प्रदर्शन के बाद सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके और कानून-व्यवस्था बनी रहे।
इतिहास के आइने में एहसान फरामोशी का जवाब
YTF के अध्यक्ष सूरज देबबर्मा ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए बांग्लादेशी कट्टरपंथियों को इतिहास का वह पन्ना याद दिलाया जब भारत ने उनकी मुक्ति में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने साफ कहा कि भारत ने ही पाकिस्तानी सेना के जुल्मों से मुक्ति दिलाकर महज 13 दिनों में (sovereign nation) के रूप में बांग्लादेश को पहचान दिलाई थी। आज उसी देश के नेता उत्तर-पूर्व भारत के खिलाफ गलत बयानबाजी कर रहे हैं, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भारतीय नागरिकों का यह आक्रोश उनकी राष्ट्रभक्ति का परिचायक है।
मिनी पाकिस्तान और पूर्वोत्तर की सुरक्षा का सवाल
टिपरा मोथा के प्रमुख प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा ने सोशल मीडिया पर एक बेहद कड़ा संदेश साझा किया है। उन्होंने स्थानीय राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को सचेत करते हुए कहा कि हमारी असली लड़ाई आपस में नहीं, बल्कि उस मानसिकता से है जो बांग्लादेश को (mini Pakistan) बनाने की ओर अग्रसर है। उनका यह बयान पूर्वोत्तर भारत की अखंडता को लेकर उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है। यह पहली बार है जब कोई स्थानीय दल इस तरह खुलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के पक्ष में खड़ा हुआ है।
अलगाववाद की धमकी और खंडित भारत का सपना
बांग्लादेश के भीतर कुछ नेता अब खुलेआम भारत की संप्रभुता को चुनौती दे रहे हैं। नेशनल सिटिजन पार्टी के नेता हसनत अब्दुल्ला ने एक रैली के दौरान पूर्वोत्तर के सात राज्यों को भारत से अलग करने जैसी दुस्साहसी धमकी दी। इस तरह की (separatist threats) न केवल भड़काऊ हैं बल्कि क्षेत्रीय शांति के लिए बड़ा खतरा भी हैं। भारत पर अलगाववादियों को शरण देने का झूठा आरोप लगाकर बांग्लादेशी नेता अपनी आंतरिक विफलताओं को छिपाने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं।
सुरक्षा का कड़ा पहरा और पुरानी गलतियों से सबक
पश्चिम त्रिपुरा के पुलिस अधीक्षक नमित पाठक ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा में किसी भी प्रकार की चूक की गुंजाइश नहीं है। बांग्लादेश सहायक उच्चायोग की सुरक्षा के लिए (security forces) के तौर पर टीएसआर और सीआरपीएफ के जवानों की भारी तैनाती की गई है। पिछले साल हुई सेंधमारी की घटना से सबक लेते हुए प्रशासन इस बार पूरी तरह मुस्तैद है। केंद्र सरकार किसी भी ऐसी स्थिति से बचना चाहती है जो कूटनीतिक स्तर पर तनाव पैदा करे।
उस्मान हादी की मौत और सुलगता ढाका
शरीफ उस्मान हादी, जो 12 फरवरी के चुनावों में एक प्रमुख चेहरा माने जा रहे थे, की मौत ने बांग्लादेश को गृहयुद्ध जैसी स्थिति में धकेल दिया है। सिंगापुर में इलाज के दौरान दम तोड़ने वाले इस नेता पर हुए हमले के बाद प्रदर्शनकारियों ने (civil unrest) का रास्ता अख्तियार कर लिया है। ढाका की सड़कों पर उतरे हुड़दंगियों ने न केवल अखबारों के दफ्तरों को निशाना बनाया, बल्कि शेख मुजीबुर्रहमान के ऐतिहासिक आवास में भी तोड़फोड़ की। अराजकता का आलम यह है कि रात के अंधेरे में भारतीय मिशनों पर पथराव की खबरें भी सामने आ रही हैं।
भविष्य की चुनौतियां और भारत की सतर्कता
बांग्लादेश में बढ़ती कट्टरपंथ की लहर और भारत विरोधी भावनाओं का ज्वार आने वाले समय में एक बड़ी चुनौती बनने वाला है। जिस तरह से (political instability) ने वहां के आम जनजीवन को प्रभावित किया है, उसका असर भारत की सीमाओं पर भी पड़ना तय है। भारत एक जिम्मेदार पड़ोसी होने के नाते शांति चाहता है, लेकिन अपनी सीमाओं और अखंडता के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। अब देखना यह है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार इन उपद्रवियों पर किस तरह लगाम कसती है।


