Angel Chakma Murder Case: त्रिपुरा के लाल के लिए क्या काफी है 4 लाख का मुआवजा, सरकार ने की मदद…
Angel Chakma Murder Case: उत्तराखंड की शांत वादियों में हुई एक हिंसक घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में अपनी जान गंवाने वाले त्रिपुरा के होनहार छात्र एंजेल चकमा के परिजनों से फोन पर बात की और उन्हें सांत्वना दी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि (Government Action) के तहत इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन ने मृतक के पिता तरुण प्रसाद चकमा को सांत्वना देते हुए आश्वासन दिया है कि राज्य सरकार इस कठिन समय में उनके साथ खड़ी है और अपराधियों को उनके किए की कड़ी सजा दिलाकर ही दम लेगी।

आर्थिक सहायता की पहली किश्त हुई जारी
सरकार ने पीड़ित परिवार की तात्कालिक जरूरतों को देखते हुए आर्थिक मदद का हाथ बढ़ाया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री के निर्देश पर अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत 4,12,500 रुपये की (Financial Assistance) राशि जारी कर दी गई है। यह राशि नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत स्वीकृत की गई है ताकि परिवार को कानूनी और सामाजिक स्तर पर संबल मिल सके। हालांकि, अपनों को खोने का दुख किसी भी धन राशि से कम नहीं किया जा सकता, फिर भी यह राज्य की ओर से न्याय की दिशा में एक प्रारंभिक कदम माना जा रहा है।
कॉलेज कैंटीन में हुई हिंसा और एमबीए छात्र की मौत
यह पूरी घटना तब शुरू हुई जब देहरादून के एक कॉलेज कैंटीन में एंजेल पर जानलेवा हमला किया गया। एक मेधावी एमबीए छात्र, जो अपने भविष्य के सुनहरे सपने बुन रहा था, उसे (Student Security) के अभाव में अपनी जान गंवानी पड़ी। सिर और रीढ़ की हड्डी में आई गंभीर चोटों ने उसे जिंदगी और मौत के बीच ला खड़ा किया और इलाज के दौरान उसकी सांसें टूट गईं। इस घटना ने न केवल शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि समाज में बढ़ती हिंसक प्रवृत्ति को भी उजागर किया है।
आरोपियों की धरपकड़ और नेपाल भागने की आशंका
पुलिस प्रशासन इस मामले में तेजी से कार्रवाई कर रहा है और अब तक छह में से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। देहरादून के एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि एक मुख्य आरोपी यज्ञराज अवस्थी, जो नेपाल का निवासी है, उसके (Police Investigation) से बचने के लिए सरहद पार भागने की आशंका है। उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में तीन मणिपुर के निवासी हैं जो देहरादून में ही रह रहे थे, जबकि दो आरोपी नाबालिग बताए जा रहे हैं। पुलिस की टीमें फरार आरोपी की तलाश में दबिश दे रही हैं।
राजनीतिक गलियारों में बढ़ा उबाल और न्याय की मांग
एंजेल चकमा की हत्या ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक सरगर्मी तेज कर दी है। विपक्ष के तमाम बड़े नेताओं ने इसे नफरत की राजनीति का परिणाम बताया है। राहुल गांधी और अखिलेश यादव जैसे दिग्गजों ने (Political Accountability) की मांग करते हुए कहा है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप कर न्याय सुनिश्चित करना चाहिए। सपा प्रमुख ने इसे समाज के लिए एक चेतावनी बताया, वहीं अन्य नेताओं ने इसे देश की एकता और भाईचारे पर एक गहरा प्रहार करार दिया है।
राष्ट्रीय कलंक और नस्लवाद के खिलाफ उठती आवाजें
पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने इस जघन्य हत्याकांड को एक ‘राष्ट्रीय कलंक’ की संज्ञा दी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पूर्वोत्तर के नागरिकों के साथ होने वाले किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार के खिलाफ एकजुट होना आवश्यक है। इसी बीच, केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू ने भी (Human Rights) के प्रति अपनी चिंता व्यक्त की और लोगों से अपील की कि इस दुखद घटना पर राजनीति करने के बजाय ऐसी मानसिकता को जड़ से खत्म करने के लिए काम किया जाना चाहिए। अरविंद केजरीवाल ने भी देश में नस्लवाद विरोधी एक सख्त कानून की आवश्यकता पर बल दिया है।
दो मुख्यमंत्रियों के बीच समन्वय और केंद्रीय हस्तक्षेप
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केवल पीड़ित परिवार से ही नहीं, बल्कि त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा से भी विस्तृत चर्चा की है। उन्होंने (Interstate Cooperation) के माध्यम से यह सुनिश्चित किया है कि पीड़ित परिवार को हर संभव मदद पहुंचाई जाए। इसके अतिरिक्त, धामी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को भी वस्तुस्थिति से अवगत कराया है। त्रिपुरा सरकार से भी गुजारिश की गई है कि वे अपने स्तर पर परिवार की आर्थिक और सामाजिक सहायता के लिए विशेष प्रावधान करें।
देवभूमि की छवि पर लगा गहरा घाव
उत्तराखंड जिसे देवभूमि कहा जाता है और जहां देश-दुनिया से बच्चे शिक्षा ग्रहण करने आते हैं, वहां ऐसी घटना का होना चिंताजनक है। मुख्यमंत्री धामी ने स्वीकार किया कि (Social Harmony) के लिए जानी जाने वाली इस धरती पर ऐसा माहौल कभी नहीं रहा और यह घटना सबके लिए अत्यंत कष्टदायक है। सरकार अब इस प्रयास में जुटी है कि बाहरी राज्यों से आने वाले छात्रों के मन में सुरक्षा का भाव दोबारा पैदा किया जा सके और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।



