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Bangladesh Turkey Defense Deal: क्या तुर्किए की स्मार्ट मिसाइलें बदल देंगी दक्षिण एशिया का सैन्य संतुलन…

Bangladesh Turkey Defense Deal: भारत और बांग्लादेश के बीच दशकों पुराने रिश्तों में आई हालिया तल्खी अब एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने अपनी सैन्य ताकत को बढ़ाने के लिए अब पश्चिम की ओर नहीं, बल्कि तुर्किए की ओर हाथ बढ़ाया है। खबर है कि बांग्लादेश ने तुर्किए से अत्याधुनिक ‘सिरिट’ (Cirit) लेजर-गाइडेड मिसाइलें खरीदने का बड़ा फैसला लिया है। यह (military procurement) केवल एक साधारण हथियार सौदा नहीं है, बल्कि यह दक्षिण एशिया में बढ़ते तनाव और बदलते कूटनीतिक समीकरणों का एक साफ संकेत है। इन मिसाइलों के आने से बांग्लादेश की मारक क्षमता में जो इजाफा होगा, उसने रक्षा विशेषज्ञों के बीच नई बहस छेड़ दी है।

Bangladesh Turkey Defense Deal
Bangladesh Turkey Defense Deal

सिरिट मिसाइल की मारक क्षमता और तकनीकी विशेषता

तुर्किए की प्रसिद्ध रक्षा कंपनी रोकेत्सन द्वारा निर्मित ‘सिरिट’ मिसाइल अपनी सटीकता और किफायती होने के लिए दुनिया भर में जानी जाती है। यह एक ऐसी ‘स्मार्ट’ मिसाइल है जो छोटे रॉकेटों और भारी टैंक-रोधी मिसाइलों के बीच की तकनीकी कमी को बड़ी खूबसूरती से भरती है। आधुनिक (precision strike) क्षमता से लैस यह मिसाइल न केवल स्थिर लक्ष्यों को निशाना बना सकती है, बल्कि चलते-फिरते बख्तरबंद वाहनों को भी पलक झपकते ही तबाह करने की ताकत रखती है। इसके लेजर-गाइडेंस सिस्टम के कारण इसका निशाना चूकने की संभावना ना के बराबर होती है, जो इसे आधुनिक युद्ध के मैदान में एक घातक हथियार बनाता है।

ड्रोन और अटैक हेलीकॉप्टरों का घातक कॉम्बिनेशन

बांग्लादेश ने पहले ही तुर्किए से घातक ‘बायराकटार टीबी-2’ ड्रोन खरीद लिए हैं, जिनका उपयोग वर्तमान में भारतीय सीमाओं की निगरानी के लिए किया जा रहा है। अब इन ड्रोनों पर सिरिट मिसाइलों को एकीकृत करने की योजना है। रक्षा मंत्रालय की निविदा प्रक्रियाओं के बीच तुर्किए की इस प्रणाली को (advanced weaponry) के तौर पर प्राथमिकता दी जा रही है। इन मिसाइलों को आसानी से हमलावर हेलीकॉप्टरों और ड्रोनों पर तैनात किया जा सकता है, जिससे बांग्लादेश वायु सेना को हवा से जमीन पर सटीक हमले करने की एक नई और खतरनाक ताकत मिल जाएगी।

भारत की सुरक्षा और चटगांव का सामरिक महत्व

भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि इन मिसाइलों की तैनाती के बाद बांग्लादेश वायु सेना की पहुंच भारतीय सीमा के अत्यंत करीब हो जाएगी। विशेष रूप से चटगांव के पहाड़ी क्षेत्रों में इन (missile systems) की मौजूदगी भारतीय सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है। सामरिक रूप से संवेदनशील इन इलाकों में किसी भी प्रकार की सैन्य बढ़त सीधे तौर पर पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है। बांग्लादेशी रक्षा अधिकारियों का मानना है कि उनकी भौगोलिक स्थिति के हिसाब से सिरिट मिसाइलें उनकी सैन्य जरूरतों के लिए बिल्कुल ‘आदर्श’ हैं।

यूनुस सरकार और पाकिस्तान-तुर्किए का नया त्रिकोण

शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश की विदेश नीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल में बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच जमी बर्फ पिघलती नजर आ रही है। चूंकि पाकिस्तान पहले से ही तुर्किए से बड़े पैमाने पर हथियारों की खरीद करता है, इसलिए बांग्लादेश का (regional defense) झुकाव भी अब इसी दिशा में बढ़ रहा है। हथियारों की यह त्रिकोणीय जुगलबंदी भारत के लिए एक नया कूटनीतिक सिरदर्द साबित हो सकती है, क्योंकि तुर्किए का रक्षा उद्योग अब दक्षिण एशिया में अपनी जड़ें तेजी से जमा रहा है।

हमलावर हेलीकॉप्टर और यूरोफाइटर की महत्वाकांक्षा

बांग्लादेश की सैन्य तैयारी केवल मिसाइलों तक ही सीमित नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ढाका अब तुर्किए से छह ‘टी-129’ अटैक हेलीकॉप्टर खरीदने के लिए अंतिम दौर की बातचीत कर रहा है। इसके साथ ही, बांग्लादेश की लंबी अवधि की योजना में शक्तिशाली चौथी पीढ़ी के ‘यूरोफाइटर’ जेट हासिल करना भी शामिल है। यह (air force modernization) योजना स्पष्ट करती है कि बांग्लादेश अपनी रक्षा क्षमताओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप लाने के लिए बेताब है। इन भारी-भरकम सौदों ने भारतीय रक्षा गलियारों में हलचल तेज कर दी है, क्योंकि यह सीधे तौर पर क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित करता है।

कूटनीतिक दिशाहीनता या सोची-समझी सैन्य बढ़त?

विश्लेषकों का मानना है कि अंतरिम सरकार द्वारा किए जा रहे ये रक्षा सौदे एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं। एक ओर जहां भारत के साथ रिश्तों में ठंडेपन की खबरें हैं, वहीं दूसरी ओर (strategic shift) के जरिए नए सैन्य साझेदार तलाशना बांग्लादेश की बदली हुई प्राथमिकताओं को दर्शाता है। तुर्किए की मिसाइल तकनीक और ड्रोन सिस्टम ने दुनिया के कई संघर्षों में अपनी उपयोगिता साबित की है, और अब बांग्लादेश इनका उपयोग अपनी सीमाओं को अभेद्य बनाने और अपनी सैन्य धमक बढ़ाने के लिए करना चाहता है।

भविष्य की चुनौतियां और भारत का संभावित रुख

आने वाले समय में भारत को बांग्लादेश की इस सैन्य बढ़त पर कड़ी नजर रखनी होगी। रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि पड़ोसी मुल्क द्वारा अत्याधुनिक (smart missile technology) का अपनाया जाना केवल आत्मरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय कूटनीति में अपनी स्थिति मजबूत करने का एक जरिया भी है। भारत को अपनी सीमा सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करने के साथ-साथ कूटनीतिक स्तर पर भी इन बदलावों का जवाब ढूंढना होगा। दक्षिण एशिया का यह बदलता रक्षा परिदृश्य आने वाले सालों में भारत-बांग्लादेश संबंधों की नई दिशा तय करेगा।

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