US-Iran Military Tension 2026: ट्रंप की ‘लॉक्ड एंड लोडेड’ धमकी पर ईरान ने किया पलटवार, क्या मध्य पूर्व में छिड़ेगा महायुद्ध…
US-Iran Military Tension 2026: अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक कड़वाहट अब सीधे सैन्य धमकियों के स्तर पर पहुंच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘लॉक्ड एंड लोडेड’ (Locked and Loaded Warning) वाली टिप्पणी ने तेहरान की सत्ता में हलचल पैदा कर दी है। ईरान ने इस पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि यदि अमेरिका ने उसके आंतरिक मामलों में दखल देने की हिमाकत की, तो मध्य पूर्व में मौजूद हर अमेरिकी सैन्य ठिकाना मलबे में तब्दील कर दिया जाएगा। यह जुबानी जंग अब एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष की ओर इशारा कर रही है।

अमेरिकी सैन्य अड्डे अब ईरान के निशाने पर
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गलिबाफ ने अमेरिका को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी फोर्स और उनके बेस हमारे टारगेट (US Military Bases At Risk) पर हैं। ईरान का यह बयान राष्ट्रपति ट्रंप के उस दावे के जवाब में आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि ईरान सरकार ने अपने ही प्रदर्शनकारियों पर घातक बल का प्रयोग किया, तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा और हस्तक्षेप करेगा। ईरान इसे अपनी संप्रभुता के खिलाफ एक बड़ी साजिश के तौर पर देख रहा है।
पूरे क्षेत्र में अराजकता फैलने की आशंका
ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनी के वरिष्ठ सलाहकार ने भी व्हाइट हाउस को आगाह किया है कि अमेरिकी दखलअंदाजी पूरे पश्चिम एशिया के लिए आत्मघाती (Regional Instability Concerns) साबित हो सकती है। उनका मानना है कि अमेरिकी हस्तक्षेप से न केवल ईरान में बल्कि पूरे क्षेत्र में ऐसी अराजकता फैलेगी जिसे संभालना किसी के बस में नहीं होगा। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी सीमाओं और आंतरिक व्यवस्था की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।
तेहरान की सड़कों पर फूटा जनता का गुस्सा
ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई बड़े शहरों में रविवार से जबरदस्त विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों की मुख्य वजह (Iran Economic Crisis 2026) है, जिसमें गिरती मुद्रा रियाल, बेकाबू मुद्रास्फीति और कमरतोड़ महंगाई ने आम आदमी का जीना मुहाल कर दिया है। दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद कर हड़ताल कर दी है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। आर्थिक तंगी से शुरू हुआ यह आक्रोश अब धीरे-धीरे एक बड़ी राजनीतिक लहर का रूप लेता जा रहा है।
हिंसा की आग में झुलसते ईरान के शहर
कुम, इस्फहान, मशहद और हमदान जैसे शहरों में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हो रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इन संघर्षों में अब तक (Protest Related Fatalities) के तहत 7 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रदर्शनकारी अब केवल आर्थिक मुद्दों पर ही नहीं, बल्कि सत्ताधारी व्यवस्था के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी कर रहे हैं। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने स्वीकार किया है कि लोगों की आजीविका के मुद्दे गंभीर हैं, लेकिन सरकार के पास मौजूदा हालातों से निपटने के लिए विकल्प बेहद सीमित हैं।
2022 के महसा अमीनी आंदोलन की यादें ताजा
वर्तमान विरोध प्रदर्शनों की तीव्रता ने 2022 के उस दौर की याद दिला दी है जब महसा अमीनी की मौत के बाद पूरा ईरान सुलग उठा था। इसे अब तक का (Largest Scale Civil Unrest) माना जा रहा है। डोनाल्ड ट्रंप का हालिया बयान इस बात की पुष्टि करता है कि अमेरिका ईरान में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर पैनी नजर रखे हुए है। वहीं, ईरानी अधिकारियों का तर्क है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन उनका संवैधानिक अधिकार है, लेकिन जो लोग अशांति फैलाएंगे उन्हें कड़ा सबक सिखाया जाएगा।
इजरायल-ईरान तनाव के बीच नई मुसीबत
मध्य पूर्व पहले से ही इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव के कारण बारूद के ढेर पर बैठा है। ऐसे समय में अमेरिका और ईरान की (Geopolitical Power Struggle) क्षेत्र की शांति को पूरी तरह नष्ट कर सकती है। दोनों देशों की ओर से दी जा रही धमकियां अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। यदि बातचीत के जरिए इस गतिरोध को नहीं सुलझाया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है।
आजीविका का संकट और सरकार की लाचारी
ईरान के राष्ट्रपति ने जनता की बढ़ती तकलीफों पर सहानुभूति तो जताई है, लेकिन ठोस समाधान देने में विफल रहे हैं। (Inflation and Currency Devaluation) ने ईरान की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है, जिससे युवाओं में बेरोजगारी और हताशा बढ़ रही है। ट्रंप प्रशासन इसी जन-असंतोष को ईरान सरकार पर दबाव बनाने के हथियार के रूप में देख रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या ईरान अपनी आंतरिक चुनौतियों से निपट पाएगा या बाहरी हस्तक्षेप एक बड़े युद्ध का कारण बनेगा।



