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Cyber Fraud Digital Arrest Case Maharashtra: 58 करोड़ की महाठगी में 2,500 पन्नों का हुआ खुलासा, कंबोडिया से जुड़ा आतंक का सिरा

Cyber Fraud Digital Arrest Case Maharashtra: महाराष्ट्र नोडल साइबर पुलिस ने देश को झकझोर देने वाले 58 करोड़ रुपये के डिजिटल अरेस्ट घोटाले में एक विशालकाय चार्जशीट दाखिल की है। लगभग 2,500 पन्नों के इस कानूनी दस्तावेज में (Cyber Crime Network) के उस काले सच को उजागर किया गया है, जिसने एक प्रतिष्ठित कारोबारी परिवार को पाई-पाई के लिए मोहताज कर दिया। पुलिस ने इस मामले में अब तक 32 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 41 अन्य वांछित अपराधियों की तलाश जारी है। जांच में सामने आया है कि इस ठगी के तार केवल भारत ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार तक फैले हुए हैं।

Cyber Fraud Digital Arrest Case Maharashtra
Cyber Fraud Digital Arrest Case Maharashtra

कंबोडिया और दुबई से बुना गया मौत का जाल

इस पूरे काले धंधे का मास्टरमाइंड भारत की सीमाओं के बाहर बैठकर रिमोट कंट्रोल से अपनी चालें चल रहा था। जांच एजेंसियों के अनुसार, विजय खन्ना नामक मुख्य हैंडलर (International Fraud Mastermind) के रूप में कंबोडिया और दुबई से इस गिरोह का संचालन कर रहा है। ठगों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए जाली केवाईसी दस्तावेजों और फेक सिम कार्ड्स का सहारा लेकर 10 हजार से अधिक ‘म्यूल बैंक अकाउंट्स’ खोले। इन खातों का इस्तेमाल पैसे को एक स्थान से दूसरे स्थान पर इतनी तेजी से घुमाने के लिए किया गया कि पुलिस भी दंग रह गई।

फर्जी कोर्टरूम और अभिनेताओं का खौफनाक ड्रामा

यह ठगी अगस्त 2025 में तब शुरू हुई जब एक फार्मास्युटिकल कारोबारी और उनकी पत्नी को एक अनजान कॉल आया। ठगों ने खुद को सीबीआई (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का बड़ा अधिकारी बताकर दंपति को मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे केस में फंसाने की धमकी दी। पीड़ितों को डराने के लिए (Digital Arrest Fake Video Call) का सहारा लिया गया, जिसमें नकली पुलिस स्टेशन, सरकारी दफ्तर और यहां तक कि एक पूरा कोर्टरूम सेट किया गया था। इस ड्रामे में बाकायदा अभिनेताओं ने जज, वकील और पुलिस अधिकारियों की भूमिका निभाई ताकि पीड़ित इसे पूरी तरह सच मान लें।

13 परतों में छिपाई गई लूट की रकम

ठगों ने पीड़ित दंपति की जीवन भर की जमा पूंजी, जो लगभग 58.1 करोड़ रुपये थी, बड़ी चालाकी से अपने खातों में ट्रांसफर करवा ली। पुलिस की वित्तीय जांच में खुलासा हुआ कि इस धन को पकड़े जाने से बचाने के लिए (Money Laundering Layers) का इस्तेमाल किया गया। गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के माध्यम से पैसे को 13 अलग-अलग लेयर्स में घुमाया गया और अंततः विदेश भेज दिया गया। जांच के दौरान यह भी वादा किया गया था कि जांच पूरी होने पर पैसे वापस कर दिए जाएंगे, जो कि सरासर झूठ था।

संदिग्ध फर्मों और धार्मिक ट्रस्टों का इस्तेमाल

जांच में कई चौकाने वाले नाम सामने आए हैं जिन्होंने इस लूट के पैसे को ठिकाने लगाने में मदद की। गुजरात के कारोबारी जयेशभाई दपा की फर्म ‘जय भवानी मैकेनिकल’ को अकेले 15.3 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। इसके अलावा (Financial Fraud Entities) जैसे मेघदूत ट्रेडिंग और जैकी एक्सप्लोरर के खातों में भी करोड़ों रुपये जमा किए गए। हद तो तब हो गई जब जांच में पता चला कि कुछ धन को धार्मिक ट्रस्टों के नाम पर भी ट्रांसफर किया गया ताकि सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान भटकाया जा सके। यहां तक कि इंडोनेशिया के बैंक खातों में भी 50 लाख रुपये भेजे जाने के प्रमाण मिले हैं।

मास्टरमाइंड की तलाश और पुलिस की अगली चुनौती

महाराष्ट्र साइबर पुलिस अब इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के ‘विजय खन्ना’ और अन्य वांछित अपराधियों तक पहुंचने के लिए इंटरपोल और अन्य विदेशी सुरक्षा एजेंसियों के साथ तालमेल बिठा रही है। (Law Enforcement Operation) के तहत फंड ट्रेल को पूरी तरह ट्रैक कर लिया गया है, जिससे कई और बड़ी गिरफ्तारियों की संभावना बढ़ गई है। पुलिस ने आम जनता को सचेत किया है कि कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई प्रावधान नहीं है और किसी भी अनजान वीडियो कॉल से घबराकर पैसे ट्रांसफर न करें।

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