बिहार

Bihar Congress Internal Rift 2026: ‘दही-चूड़ा’ भोज ने खोली बगावत की पोल, क्या राजेश राम की कुर्सी छीनने की तैयारी में है गुट…

Bihar Congress Internal Rift 2026: बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद कांग्रेस के भीतर मची रार अब सड़कों पर आ गई है। शुक्रवार को पटना में आयोजित एक ‘दही-चूड़ा भोज’ ने पार्टी के भीतर गहरी होती दरार को जगजाहिर कर दिया। पूर्व विधायक छत्रपति यादव के आवास पर जुटे दिग्गजों ने (Political Groupism) का ऐसा नजारा पेश किया, जिसने आलाकमान की चिंता बढ़ा दी है। यह भोज महज एक पारंपरिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।

Bihar Congress Internal Rift 2026
Bihar Congress Internal Rift 2026

सदाकत आश्रम को चुनौती देता बागी गुट

इस विशेष भोज का आयोजन एआईसीसी सदस्य आनंद माधव और छत्रपति यादव समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने मिलकर किया था। आयोजन के दौरान नेताओं ने सीधे तौर पर प्रदेश कार्यालय पर निशाना साधा। छत्रपति यादव ने स्पष्ट किया कि इस (Alternative Leadership) भोज में उन सभी कांग्रेसियों को ससम्मान बुलाया गया, जिन्हें पार्टी के आधिकारिक कार्यालय ‘सदाकत आश्रम’ में आयोजित कार्यक्रम में नजरअंदाज किया गया था। यह बयान बताता है कि पार्टी दो फाड़ हो चुकी है।

आधिकारिक भोज से विधायकों की रहस्यमयी दूरी

बता दें कि बीते सोमवार को प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम की अगुवाई में पार्टी का आधिकारिक दही-चूड़ा भोज हुआ था, लेकिन वहां सन्नाटा पसरा रहा। पार्टी के सभी 6 विधायकों ने उस कार्यक्रम से (Legislative Discontent) के चलते दूरी बनाए रखी थी। हालांकि, उस समय राजेश राम ने नाराजगी की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया था, लेकिन शुक्रवार को बागी गुट के जुटान ने उनकी दलीलों की हवा निकाल दी है।

टिकटों के सौदेबाजी के आरोपों ने सुलगाई आग

कांग्रेस के भीतर चल रहे इस घमासान की जड़ें विधानसभा चुनाव के दौरान हुए टिकट वितरण में छिपी हैं। नाराज गुट का सीधा आरोप है कि प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरु और अध्यक्ष राजेश राम ने समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी की। उन्होंने (Election Ticket Controversy) को हवा देते हुए आरोप लगाया कि बाहरियों को मोटी रकम लेकर टिकट बांटे गए, जिसकी वजह से पार्टी को चुनाव में शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा।

पूर्व अध्यक्षों का साथ मिलने से बढ़ा बागी गुट का कद

अब इस गुटबाजी ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब पार्टी के दो पूर्व प्रदेश अध्यक्षों, अखिलेश सिंह और मदन मोहन झा ने भी बागियों को अपना खुला समर्थन दे दिया। इन (Veteran Politicians) के आने से नाराज गुट का मनोबल सातवें आसमान पर है। अब पटना से लेकर दिल्ली तक पार्टी मुख्यालयों के बाहर विरोध प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया है, जिससे संगठन की साख पर बट्टा लग रहा है।

भाजपा और एनडीए की नजरें कांग्रेस की टूट पर

कांग्रेस की इस आंतरिक कलह पर विपक्षी गठबंधन एनडीए गिद्ध जैसी नजरें जमाए बैठा है। सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज है कि कांग्रेस के सभी 6 विधायक जल्द ही पाला बदल सकते हैं। एनडीए के नेता लगातार (Party Defection) के दावे कर रहे हैं और कांग्रेस के भोज पर तंज कसते हुए कह रहे हैं कि कांग्रेस का ‘दही’ अब पूरी तरह खट्टा हो चुका है। इससे पार्टी के वजूद पर ही खतरा मंडराने लगा है।

राजेश राम के नेतृत्व पर मंडराते खतरे के बादल

वर्तमान प्रदेश नेतृत्व के लिए अब अपनी साख बचाना मुश्किल होता जा रहा है। एक तरफ जहां कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अनुभवी नेताओं का साथ छोड़ना (Organizational Crisis) को गहरा रहा है। यदि जल्द ही दिल्ली दरबार से कोई बड़ा हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो बिहार में कांग्रेस ताश के पत्तों की तरह बिखर सकती है।

बजट सत्र में हो सकता है बड़ा उलटफेर

आने वाले दिनों में बिहार विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने वाला है और माना जा रहा है कि इसी दौरान कांग्रेस के भीतर मची यह उठापटक किसी निर्णायक मोड़ पर पहुंचेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि (Political Realignment) की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। कांग्रेस को अब न सिर्फ अपनी गुटबाजी खत्म करनी होगी, बल्कि अपने विधायकों को टूटने से बचाने के लिए भी एड़ी-चोटी का जोर लगाना होगा।

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