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Governance – मंत्रालयों के प्रदर्शन आकलन के बाद खर्चों पर सख्ती के संकेत

Governance – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई हालिया मंत्रिपरिषद बैठक में केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज की विस्तृत समीक्षा की गई। इस दौरान वर्ष 2025 के प्रदर्शन के आधार पर मंत्रालयों का आंतरिक मूल्यांकन प्रस्तुत किया गया, जिसे कैबिनेट सचिवालय ने तैयार किया है। बैठक में प्रशासनिक दक्षता, जनसेवा और वित्तीय अनुशासन को लेकर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने मंत्रियों को अनावश्यक खर्चों से बचने और सरकारी संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग के निर्देश भी दिए।

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मंत्रालयों के कामकाज की नई प्रणाली से समीक्षा

बैठक में कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने मंत्रालयों का विस्तृत स्कोरकार्ड पेश किया। इस नई मूल्यांकन प्रणाली के जरिए मंत्रालयों के प्रदर्शन को कई स्तरों पर परखा गया। इसमें सिर्फ योजनाओं के क्रियान्वयन ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों तक सेवाएं पहुंचाने की गति और प्रशासनिक कार्यकुशलता को भी शामिल किया गया। नीति आयोग से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने सरकारी प्रक्रियाओं को अधिक सरल और लोगों के लिए सुलभ बनाने पर जोर दिया।

किन आधारों पर हुआ मूल्यांकन

सरकारी सूत्रों के अनुसार मंत्रालयों के मूल्यांकन में कई प्रमुख मानकों को शामिल किया गया। इनमें जन शिकायतों के समाधान की गति, लंबित फाइलों के निपटारे की स्थिति, विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय और संकट के समय निर्णय लेने की क्षमता को अहम माना गया। पश्चिम एशिया में जारी तनाव जैसे वैश्विक घटनाक्रमों के दौरान देशहित से जुड़े फैसलों और तैयारी को भी समीक्षा का हिस्सा बनाया गया।

कुछ मंत्रालयों के प्रदर्शन को मिली सराहना

समीक्षा में जिन मंत्रालयों के कामकाज को बेहतर माना गया, उनमें उपभोक्ता मामले, कोयला, ऊर्जा और स्वास्थ्य मंत्रालय शामिल रहे। उपभोक्ता मामले मंत्रालय को शिकायत निवारण और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया के लिए सराहा गया। वहीं कोयला मंत्रालय को फाइलों के तेजी से निपटारे और विभागीय प्रबंधन में बेहतर प्रदर्शन के लिए सकारात्मक आकलन मिला। ऊर्जा और स्वास्थ्य मंत्रालयों को भी अपने-अपने क्षेत्रों में तय लक्ष्यों के अनुरूप कार्य करने पर प्रशंसा मिली।

खर्चों में कटौती और वीआईपी संस्कृति पर जोर

करीब चार घंटे चली इस बैठक में सरकारी खर्चों को नियंत्रित करने पर विशेष फोकस दिखाई दिया। प्रधानमंत्री ने मंत्रियों को बड़े काफिलों और गैर-जरूरी सरकारी खर्चों से बचने की सलाह दी। सूत्रों के मुताबिक, विदेश यात्राओं को भी आवश्यकता आधारित रखने की बात कही गई है। केवल उन्हीं दौरों को मंजूरी देने पर जोर है जो सीधे तौर पर राष्ट्रीय हितों या रणनीतिक जरूरतों से जुड़े हों।

अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों और ऊर्जा रणनीति पर चर्चा

बैठक में कुछ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों को फिलहाल स्थगित रखने का भी निर्णय लिया गया। इसके पीछे सरकारी खर्चों में कमी लाने की रणनीति बताई जा रही है। साथ ही पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा आपूर्ति मार्गों को लेकर बनी वैश्विक चिंता के बीच वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर फोकस बढ़ाने के निर्देश दिए गए। बायोगैस और नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

आम लोगों पर क्या पड़ सकता है असर

सरकार की इस नई समीक्षा प्रणाली को प्रशासनिक जवाबदेही से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे सरकारी विभागों में लंबित कार्यों के निपटारे की रफ्तार बढ़ सकती है। शिकायतों के समाधान में तेजी आने और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन की संभावना भी जताई जा रही है। सरकारी स्तर पर खर्चों में नियंत्रण से विकास परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे पर अधिक संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में मदद मिल सकती है।

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