Ukraine War: दावोस से क्रेमलिन तक शांति प्रयास, यूक्रेन युद्ध पर निर्णायक दबाव बढ़ा
Ukraine War: वैश्विक राजनीति इस समय तेजी से बदलते दौर से गुजर रही है। एक ओर स्विट्जरलैंड के दावोस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बोर्ड ऑफ पीस के गठन की घोषणा कर अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहल की, तो दूसरी ओर रूस की राजधानी मॉस्को में पूरी रात चली उच्चस्तरीय वार्ता ने यूक्रेन युद्ध को लेकर नई उम्मीदें और नई चिंताएं दोनों पैदा कर दी हैं। लंबे समय बाद अमेरिका के वरिष्ठ दूत स्टीव विटकॉफ और डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर ने क्रेमलिन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से सीधी बातचीत की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य चार साल से जारी यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के रास्ते तलाशना था।

क्रेमलिन में रातभर चली अहम बैठक
मॉस्को में हुई इस मैराथन बैठक के दौरान व्लादिमीर पुतिन ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि शांति समझौता तभी संभव है, जब यूक्रेन उन इलाकों पर रूस के नियंत्रण को मान्यता दे, जो इस समय रूसी सेना के कब्जे में हैं। पुतिन का यह बयान यूक्रेन के लिए बेहद मुश्किल स्थिति पैदा करता है, क्योंकि इससे देश की क्षेत्रीय अखंडता पर सीधा सवाल खड़ा होता है। क्रेमलिन के विदेश मामलों के सलाहकार यूरी उशाकोव ने भी बैठक के बाद दोहराया कि रूस अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों से पीछे हटने को तैयार नहीं है।
जेलेंस्की की दो टूक, जमीन नहीं छोड़ेंगे
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की पहले ही कई बार साफ कर चुके हैं कि उनका देश किसी भी कीमत पर अपने इलाके नहीं छोड़ेगा। उनका कहना है कि पूर्वी यूक्रेन के जिन क्षेत्रों पर रूस ने कब्जा किया है, वह पूरी तरह अवैध है। जेलेंस्की के लिए यह संघर्ष केवल जमीन का नहीं, बल्कि संप्रभुता और राष्ट्रीय सम्मान का सवाल बन चुका है। ऐसे में रूस की शर्तों को स्वीकार करना उनके लिए राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर बेहद कठिन होगा।
पश्चिमी मदद को लेकर यूक्रेन की नाराजगी
यह बैठक ऐसे समय पर हुई, जब जेलेंस्की ने सार्वजनिक रूप से कहा कि रूस के हमलों के बावजूद यूरोप और अमेरिका से अपेक्षित सैन्य सहायता नहीं मिल रही है। उन्होंने यहां तक कहा कि मौजूदा हालात में यूक्रेन को व्लादिमीर पुतिन की दया पर छोड़ दिया गया है। जेलेंस्की का आरोप है कि यूरोपियन यूनियन के सभी 27 देश एकजुट होकर यूक्रेन का समर्थन नहीं कर रहे और कुछ देश तो परोक्ष रूप से रूस के पक्ष में खड़े नजर आ रहे हैं।
बोर्ड ऑफ पीस पर पुतिन का समर्थन
दिलचस्प बात यह है कि पुतिन ने डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित बोर्ड ऑफ पीस के लिए भी सहमति जताई है। संयुक्त अरब अमीरात में होने वाली आगामी बैठक में रूस, यूक्रेन और अमेरिका के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसी बैठक में गाजा से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ बोर्ड ऑफ पीस की भूमिका पर भी चर्चा हुई। पुतिन ने घोषणा की कि रूस इस बोर्ड के लिए एक अरब डॉलर की आर्थिक मदद देने को तैयार है। उन्होंने सुझाव दिया कि यह राशि उन रूसी संपत्तियों से ली जाए, जिन्हें अमेरिका ने सीज कर रखा है।
लंबा युद्ध, दोनों देशों पर भारी दबाव
रूस और यूक्रेन के बीच पहला बड़ा टकराव 2014 में हुआ था, जबकि 2022 में युद्ध ने व्यापक रूप ले लिया। अब तक रूस करीब 20 प्रतिशत यूक्रेनी क्षेत्र पर कब्जा कर चुका है। हालांकि इतनी लंबी सीमा पर सुरक्षा बनाए रखना रूस के लिए भी आसान नहीं है, खासकर तब जब उसकी अर्थव्यवस्था लगातार दबाव में है। दूसरी ओर यूक्रेन की स्थिति भी कमजोर होती जा रही है। हथियारों और संसाधनों की कमी, सीमित विदेशी मदद और लगातार हमलों ने देश को थका दिया है।
शांति की उम्मीद या नई शर्तों का जाल
कुल मिलाकर मौजूदा हालात में शांति की कोशिशें जरूर तेज हुई हैं, लेकिन रास्ता अब भी मुश्किलों से भरा है। रूस अपनी शर्तों पर अड़ा है, यूक्रेन अपने सिद्धांतों से पीछे हटने को तैयार नहीं, और पश्चिमी देशों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि दावोस और क्रेमलिन में हुई इन पहलों से युद्ध थमता है या फिर यह संघर्ष और लंबा खिंचता है।



