BPSC TRE-3 – पेपर लीक मामले में डॉक्टर गिरफ्तार, जांच में सामने आए नए कनेक्शन
BPSC TRE-3 – बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-3) के प्रश्नपत्र लीक मामले में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने जांच को आगे बढ़ाते हुए एक डॉक्टर को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी डॉ. मनीष कुमार का नाम कथित पेपर लीक नेटवर्क से जुड़ा पाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहन जांच जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।

संजीव मुखिया के बेटे से संपर्क की जांच
ईओयू के मुताबिक, गिरफ्तार डॉ. मनीष कुमार की पहचान जहानाबाद जिले के नेहालपुर गांव निवासी के रूप में हुई है। एजेंसी का दावा है कि उसके संबंध इस मामले के मुख्य आरोपित संजीव मुखिया के बेटे डॉ. शिव से थे। प्रारंभिक जांच में दोनों के बीच संपर्क होने की जानकारी सामने आई है। इसी आधार पर जांच एजेंसी अब दोनों के बीच हुए लेनदेन और अन्य गतिविधियों की भी पड़ताल कर रही है।
अभ्यर्थियों को हजारीबाग ले जाने का आरोप
जांच एजेंसी का आरोप है कि शिक्षक भर्ती परीक्षा से कुछ दिन पहले डॉ. मनीष ने करीब 30 अभ्यर्थियों को पटना से वाहन के जरिए झारखंड के हजारीबाग स्थित एक होटल तक पहुंचाया था। ईओयू का कहना है कि जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार वहां परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने की कथित योजना बनाई गई थी। हालांकि इन आरोपों की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
प्रति अभ्यर्थी तय थी रकम, जांच जारी
ईओयू के अनुसार, जांच में यह भी जानकारी मिली है कि कथित तौर पर प्रत्येक अभ्यर्थी के बदले 50 हजार रुपये देने की बात तय हुई थी। एजेंसी का दावा है कि यह पूरी साजिश शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करने के उद्देश्य से रची गई थी। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में वित्तीय लेनदेन और संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
अब तक 296 गिरफ्तारियां
आर्थिक अपराध इकाई ने बताया कि 15 मार्च 2024 को प्रस्तावित बीपीएससी टीआरई-3 परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले में यह 296वीं गिरफ्तारी है। एजेंसी का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितता फैलाने वाले गिरोहों और उनसे आर्थिक लाभ प्राप्त करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। साथ ही मामले के अन्य पहलुओं की भी विस्तार से जांच की जा रही है।
आरोपी की शैक्षणिक और सेवा पृष्ठभूमि
ईओयू के अनुसार, डॉ. मनीष कुमार ने वर्ष 2021 में नालंदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (NMCH), पटना से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की थी। वह कैमूर जिले में सरकारी चिकित्सक के रूप में कार्य कर चुका है। बाद में उसने सरकारी सेवा से इस्तीफा देकर स्नातकोत्तर (PG) की तैयारी शुरू कर दी थी। जांच एजेंसी फिलहाल उसके पेशेवर और व्यक्तिगत संपर्कों की भी जांच कर रही है।
अन्य आरोपियों की तलाश जारी
जांच एजेंसी का कहना है कि पेपर लीक से जुड़े पूरे नेटवर्क की पहचान करने के लिए लगातार छानबीन की जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, दस्तावेज और अन्य उपलब्ध जानकारियों के आधार पर संभावित आरोपियों की भूमिका का सत्यापन किया जा रहा है। ईओयू ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने तक इस मामले में आवश्यकता के अनुसार आगे भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी