बिहार

BridgeMonitoring – बिहार में पुलों की निगरानी के लिए नई तकनीक पर जोर

BridgeMonitoring – बिहार में पुलों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को अधिक आधुनिक बनाने की दिशा में पथ निर्माण विभाग नई तकनीकों के उपयोग पर विचार कर रहा है। हाल के वर्षों में कुछ प्रमुख पुलों में तकनीकी समस्याएं सामने आने के बाद विभाग ने संरचनात्मक निगरानी को और प्रभावी बनाने की पहल शुरू की है। इसी क्रम में पुलों की स्थिति पर नजर रखने के लिए सैटेलाइट आधारित तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाओं का अध्ययन किया जा रहा है।

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आधुनिक तकनीक के उपयोग पर हो रहा अध्ययन

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, सैटेलाइट के माध्यम से पुलों की निगरानी और संरचनात्मक बदलावों का पता लगाने की तकनीक को समझने के लिए विशेषज्ञों से चर्चा की जा रही है। इस संबंध में विदेशी तकनीकी विशेषज्ञों के साथ भी विचार-विमर्श किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि इस तकनीक की उपयोगिता, लागत और प्रभावशीलता का आकलन करने के बाद आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

हाल ही में आयोजित एक ऑनलाइन बैठक में अभियंताओं और तकनीकी विशेषज्ञों ने इस प्रणाली के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। बैठक का उद्देश्य यह समझना था कि पुलों की दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में यह तकनीक किस प्रकार मददगार हो सकती है।

हाल की घटनाओं के बाद बढ़ी सतर्कता

राज्य में कुछ पुलों से जुड़ी घटनाओं के बाद विभाग ने निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष ध्यान देना शुरू किया है। भागलपुर स्थित विक्रमशिला सेतु और अन्य पुलों में सामने आई तकनीकी चुनौतियों ने नियमित निरीक्षण की आवश्यकता को और महत्वपूर्ण बना दिया है।

अधिकारियों का कहना है कि पुलों की सुरक्षा केवल निर्माण तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उनकी लगातार निगरानी और समय पर मरम्मत भी उतनी ही जरूरी है।

साल में दो बार होगा व्यापक निरीक्षण

बिहार राज्य पुल निर्माण निगम ने निर्णय लिया है कि राज्य के पुलों का नियमित अंतराल पर निरीक्षण किया जाएगा। योजना के तहत वर्ष में कम से कम दो बार सभी प्रमुख पुलों की तकनीकी समीक्षा की जाएगी। इस प्रक्रिया का उद्देश्य संभावित समस्याओं की समय रहते पहचान करना और आवश्यक मरम्मत कार्य सुनिश्चित करना है।

जानकारी के अनुसार, राज्यभर के हजारों पुलों का प्रारंभिक निरीक्षण भी किया जा चुका है। निरीक्षण के दौरान अधिकांश संरचनाएं सामान्य स्थिति में पाई गईं, हालांकि विभाग निगरानी व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

तैयार हो रही है नई कार्यप्रणाली

पथ निर्माण विभाग पुलों की निगरानी और रखरखाव के लिए एक मानक कार्यप्रणाली विकसित करने की प्रक्रिया में है। इसके तहत अभियंताओं और तकनीकी टीमों को नियमित निरीक्षण, रिपोर्टिंग और रखरखाव संबंधी जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी।

विभाग का मानना है कि स्पष्ट दिशा-निर्देश और नियमित समीक्षा से पुलों की आयु बढ़ाने और सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

कैसे काम करती है सैटेलाइट आधारित निगरानी

विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक सैटेलाइट तकनीक के जरिए किसी भी संरचना में होने वाले बेहद सूक्ष्म बदलावों को भी रिकॉर्ड किया जा सकता है। रडार आधारित विश्लेषण प्रणाली की मदद से पुलों में आने वाले झुकाव, कंपन या अन्य संरचनात्मक परिवर्तनों का पता शुरुआती स्तर पर लगाया जा सकता है।

इस तकनीक की खासियत यह है कि यह उन बदलावों को भी पहचान सकती है जो सामान्य निरीक्षण में दिखाई नहीं देते। इससे संभावित जोखिमों का समय रहते आकलन करना संभव हो सकता है।

सुरक्षा को प्राथमिकता देने की तैयारी

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि राज्य में बुनियादी ढांचे की मजबूती और सार्वजनिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। नई तकनीकों के उपयोग और नियमित निरीक्षण की व्यवस्था से पुलों की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश की जा रही है।

फिलहाल सैटेलाइट आधारित प्रणाली को लेकर अध्ययन जारी है और इसके निष्कर्षों के आधार पर भविष्य में विस्तृत योजना लागू की जा सकती है।

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