CyberFraud – खनन पोर्टल में कथित छेड़छाड़ से करोड़ों के राजस्व नुकसान की जांच तेज
CyberFraud – बिहार में बालू खनन से जुड़े एक कथित बड़े अनियमितता मामले की जांच ने नया मोड़ ले लिया है। आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने खनन विभाग के डिजिटल पोर्टल में संभावित तकनीकी हस्तक्षेप और उससे जुड़े राजस्व नुकसान की जांच को तेज कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, मामले में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि पोर्टल तक पहुंच और उसके संचालन से जुड़े अधिकार किन लोगों के पास थे तथा कथित गड़बड़ियां किस स्तर पर हुईं।

तकनीकी ऑडिट से सामने आएंगे अहम तथ्य
जांच एजेंसियों ने पूरे मामले की तह तक पहुंचने के लिए विस्तृत तकनीकी ऑडिट शुरू कराया है। इस प्रक्रिया में राज्य की तकनीकी संस्था बेल्ट्रॉन के साथ एक केंद्रीय विशेषज्ञ एजेंसी की भी मदद ली जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि ऑडिट रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकेगा कि पोर्टल के लॉगिन सिस्टम, यूजर एक्सेस और डेटा प्रबंधन में किन स्तरों पर हस्तक्षेप हुआ था।
ईओयू के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदार व्यक्तियों और संस्थाओं की भूमिका को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकती है।
सॉफ्टवेयर प्रणाली में हस्तक्षेप के आरोप
प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि खनन से संबंधित डिजिटल प्रणाली में अनधिकृत बदलाव किए गए थे। आरोप है कि कुछ तकनीकी कर्मियों और अन्य संबंधित लोगों की मिलीभगत से पोर्टल की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित किया गया। जांच एजेंसियां यह भी पड़ताल कर रही हैं कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना खनन से जुड़ी अनुमतियों और मात्रा संबंधी विवरणों में बदलाव कैसे संभव हुआ।
सूत्रों के अनुसार, कुछ मामलों में आवंटित सीमा से अधिक बालू निकासी और बिक्री की आशंका जताई गई है, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा हो सकता है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
कई जिलों तक फैली जांच
यह मामला किसी एक जिले तक सीमित नहीं माना जा रहा है। जांच एजेंसियों के अनुसार, राज्य के विभिन्न हिस्सों में इससे जुड़े कई प्रकरण दर्ज किए गए हैं। अब तक 17 जिलों में कुल 62 मामले सामने आए हैं, जिनकी अलग-अलग स्तर पर जांच चल रही है।
ईओयू की विशेष टीमें दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही हैं। मामले से जुड़े लाइसेंसधारकों और अन्य संबंधित पक्षों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली को समझा जा सके।
राजस्व नुकसान का आकलन जारी
अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिक स्तर पर सरकारी खजाने को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचने की आशंका है। इसी वजह से वित्तीय रिकॉर्ड, खनन अनुमति और डिजिटल एंट्री का मिलान किया जा रहा है। जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वास्तविक नुकसान का सही आकलन हो सके और जिम्मेदार लोगों की पहचान की जा सके।
दोषियों पर होगी कार्रवाई
ईओयू ने स्पष्ट किया है कि तकनीकी ऑडिट और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि किसी सरकारी अधिकारी, तकनीकी कर्मचारी या कारोबारी की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कदम उठाए जाएंगे।
जांच एजेंसियों का कहना है कि डिजिटल सिस्टम से जुड़े इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।