बिहार

CyberFraud – फर्जी मुद्रा लोन और GST मंजूरी के नाम पर करोड़ों की ठगी का खुलासा

CyberFraud – प्रधानमंत्री मुद्रा लोन और GST मंजूरी दिलाने का झांसा देकर कई राज्यों के लोगों से कथित तौर पर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। साइबर पुलिस ने पटना के पत्रकारनगर थाना क्षेत्र स्थित योगीपुर में एक फ्लैट पर छापेमारी कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह ऑनलाइन माध्यमों और फोन कॉल के जरिए लोगों को विश्वास में लेकर उनसे प्रोसेसिंग शुल्क के नाम पर रकम वसूलता था।

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किराए के फ्लैट से संचालित हो रहा था नेटवर्क

पुलिस अधिकारियों के अनुसार जिस फ्लैट पर कार्रवाई की गई, उसे पढ़ाई के उद्देश्य से किराए पर लिया गया था। जांच के दौरान पता चला कि वहीं से साइबर ठगी का पूरा नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। गुप्त सूचना मिलने के बाद पुलिस ने छापा मारा और मौके से बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, बैंकिंग दस्तावेज और नकदी बरामद की।

कई राज्यों के लोगों को बनाया गया निशाना

जांच एजेंसियों का कहना है कि शुरुआती पड़ताल में बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के अनेक लोगों के इस गिरोह का शिकार होने के संकेत मिले हैं। पुलिस अब शिकायतों और डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर संभावित पीड़ितों की पहचान करने में जुटी है। अधिकारियों का अनुमान है कि इस तरीके से बड़ी रकम की धोखाधड़ी की गई हो सकती है।

तीन आरोपी गिरफ्तार, कई सामान बरामद

पुलिस ने कार्रवाई के दौरान नवादा निवासी अक्षय कुमार, गया निवासी शिवम कुमार और पटना की रहने वाली रिमझिम कुमारी को गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से 14 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, एक टैबलेट, 15 एटीएम कार्ड, पांच चेकबुक, चार पासबुक, तीन नोटबुक, सात सिम कार्ड और छह लाख रुपये से अधिक नकदी बरामद की गई। पुलिस इन सभी सामानों की जांच कर डिजिटल साक्ष्य जुटा रही है।

कॉल और सोशल मीडिया के जरिए लोगों से संपर्क

जांच में सामने आया कि गिरोह लोगों तक पहुंचने के लिए फोन कॉल और सोशल मीडिया का सहारा लेता था। पुलिस के अनुसार महिला आरोपी संभावित ग्राहकों से संपर्क कर उन्हें प्रधानमंत्री मुद्रा लोन और GST मंजूरी दिलाने का भरोसा दिलाती थी। इसके बाद प्रक्रिया पूरी कराने के नाम पर प्रत्येक व्यक्ति से तीन से पांच हजार रुपये तक की राशि ली जाती थी। अधिकारियों का कहना है कि यह रकम कथित प्रोसेसिंग शुल्क के रूप में वसूली जाती थी।

बड़े नेटवर्क की आशंका पर जांच जारी

पुलिस का मानना है कि इस गिरोह से अन्य लोग भी जुड़े हो सकते हैं। जांच एजेंसियां बैंक खातों, मोबाइल डेटा और डिजिटल लेनदेन की पड़ताल कर रही हैं ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके। यह भी जांच की जा रही है कि आरोपियों को किसी अन्य व्यक्ति या संगठित समूह का सहयोग तो नहीं मिल रहा था।

डिजिटल साक्ष्यों की हो रही जांच

साइबर पुलिस ने बताया कि बरामद नकदी को बैंक में जमा करने की तैयारी की जा रही थी, तभी छापेमारी कर उसे जब्त कर लिया गया। फिलहाल आरोपियों से पूछताछ जारी है और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से प्राप्त जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी सरकारी योजना या लोन से जुड़ी प्रक्रिया के लिए केवल आधिकारिक माध्यमों का ही उपयोग करें और अनजान कॉल या सोशल मीडिया संदेशों पर भरोसा करने से बचें।

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