बिहार

EOUInvestigation – किशनगंज SDPO की संपत्तियों की जांच तेज, कई राज्यों में छानबीन

EOUInvestigation – बिहार के किशनगंज जिले में पदस्थापित एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में जांच अब तेज हो गई है। आर्थिक अपराध इकाई इस मामले में लगातार कार्रवाई कर रही है और विभिन्न राज्यों में फैली संपत्तियों की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच के दायरे में सिर्फ स्थानीय स्तर ही नहीं, बल्कि राज्य के बाहर तक के ठिकाने भी शामिल हैं, जिससे मामला और व्यापक होता जा रहा है।

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तीन अलग-अलग टीमों को सौंपी गई जिम्मेदारी
इस पूरे मामले की जांच के लिए आर्थिक अपराध इकाई ने तीन अलग-अलग टीमें गठित की हैं। एक टीम पिछले कई दिनों से किशनगंज में डेरा डाले हुए है और वहां से जुड़े दस्तावेजों और संपत्तियों की जानकारी की पुष्टि कर रही है। दूसरी टीम को बिहार के अन्य जिलों जैसे अररिया, मुंगेर और पटना में मिले सुरागों पर काम करने की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं तीसरी टीम को जल्द ही दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में भेजे जाने की तैयारी है, जहां से भी निवेश और संपत्ति से जुड़े संकेत मिले हैं।

छापेमारी के बाद जांच में आई तेजी
हाल ही में संबंधित अधिकारी के ठिकानों पर की गई छापेमारी के बाद जांच को गति मिली है। इस कार्रवाई के दौरान मिले दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अब विभिन्न स्थानों पर संपत्तियों का सत्यापन किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि संबंधित विभागों और संस्थानों से भी जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि हर पहलू की जांच की जा सके।

नेपाल और पश्चिम बंगाल तक जुड़े सुराग
जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि संपत्तियों के तार पड़ोसी देश नेपाल और पश्चिम बंगाल से भी जुड़े हो सकते हैं। इन स्थानों पर संभावित निवेश और संपत्तियों की जानकारी के लिए स्थानीय प्रशासन से संपर्क किया गया है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में चल रही अन्य गतिविधियों के कारण जानकारी जुटाने में थोड़ी कठिनाई आ रही है, लेकिन जांच एजेंसियां लगातार प्रयास कर रही हैं।

संदिग्ध संपर्कों की भी जांच जारी
मामले की तह तक जाने के लिए केवल संपत्तियों ही नहीं, बल्कि संबंधित अधिकारी के संपर्कों की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों को ऐसे संकेत मिले हैं कि उनके कुछ लोगों से नियमित संपर्क थे, जिनमें कथित तौर पर प्रभावशाली और संदिग्ध पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति शामिल हो सकते हैं। कॉल डिटेल्स और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर इन संपर्कों की भी जांच की जा रही है।

बेनामी संपत्तियों के नेटवर्क की पड़ताल
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि कई संपत्तियां सीधे नाम पर न होकर अन्य व्यक्तियों या परिचितों के नाम पर खरीदी गई हो सकती हैं। इसमें करीबी लोगों और परिचितों के नाम का उपयोग किए जाने की आशंका जताई गई है। जांच एजेंसियां इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए दस्तावेजों और लेनदेन की बारीकी से जांच कर रही हैं, ताकि वास्तविक मालिकाना हक का पता लगाया जा सके।

करीबी लोगों के नाम पर निवेश के संकेत
जांच में यह भी पाया गया है कि कुछ संपत्तियां ऐसे लोगों के नाम पर दर्ज हैं, जो सीधे तौर पर अधिकारी के संपर्क में रहे हैं। इनमें निजी संबंधों और घरेलू सहयोगियों के नाम भी शामिल होने की बात सामने आई है। इन सभी मामलों की पुष्टि के लिए संबंधित व्यक्तियों और दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

जांच के अगले चरण पर नजर
आर्थिक अपराध इकाई इस मामले को गंभीरता से लेते हुए हर स्तर पर जांच को आगे बढ़ा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों के सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, जिस पर सभी की नजर बनी हुई है।

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