GangaPath – बिहार में तीन नए गंगा पथ की तैयारी तेज, कई जिलों की कनेक्टिविटी होगी बेहतर
GangaPath- बिहार में सड़क अवसंरचना को मजबूत बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने तीन नए गंगा पथ परियोजनाओं की तैयारी तेज कर दी है। इन प्रस्तावित मार्गों के लिए जल्द ही विस्तृत सर्वेक्षण शुरू होने वाला है। जानकारी के अनुसार, इस प्रक्रिया के लिए जारी निविदा में कई एजेंसियों ने रुचि दिखाई थी और अब उनमें से एक परामर्शी संस्था का चयन अगले कुछ दिनों में किया जाएगा। बिहार राज्य पथ विकास निगम इस पूरी प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटा है।

तीन नए मार्गों के लिए सर्वे की होगी शुरुआत
प्रस्तावित परियोजनाओं में बिदुपुर से दिघवारा तक बनने वाला गंगा अंबिका पथ, मनेर से बक्सर तक प्रस्तावित विश्वामित्र पथ तथा सारण जिले के दरिहारा (कोन्हुआ) से गोपालगंज के डुमरिया घाट तक बनने वाला नारायणी पथ शामिल हैं। इन तीनों मार्गों के लिए अंतिम एलाइनमेंट, संभावित निर्माण लागत, यातायात की भविष्य की आवश्यकता और अन्य तकनीकी पहलुओं का विस्तृत अध्ययन कराया जाएगा।
भविष्य के ट्रैफिक और टोल संभावनाओं का भी होगा आकलन
पथ विकास निगम के अधिकारियों के अनुसार, अध्ययन के दौरान अगले 20 से 25 वर्षों तक इन सड़कों पर संभावित यातायात दबाव का अनुमान लगाया जाएगा। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि इन मार्गों से टोल शुल्क के रूप में कितनी आय होने की संभावना है। इस पूरे तकनीकी मूल्यांकन और सर्वेक्षण का कार्य लगभग छह महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
तीनों परियोजनाओं की लंबाई भी तय
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बिदुपुर-दिघवारा गंगा अंबिका पथ की लंबाई लगभग 56 किलोमीटर होगी और यह गंगा नदी के दक्षिणी किनारे के समानांतर विकसित किया जाएगा। वहीं मनेर-बक्सर विश्वामित्र पथ करीब 90 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित है। इसके अलावा सारण के दरिहारा (कोन्हुआ) से गोपालगंज के डुमरिया घाट तक बनने वाला नारायणी पथ लगभग 73.51 किलोमीटर लंबा होगा।
कई जिलों में आवागमन होगा आसान
इन तीनों सड़क परियोजनाओं के पूरा होने के बाद पटना, सारण, सीवान, गोपालगंज, भोजपुर और बक्सर सहित आसपास के क्षेत्रों के बीच सड़क संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है। इससे यात्रा का समय कम हो सकता है और क्षेत्रीय परिवहन व्यवस्था को भी मजबूती मिलने की संभावना है। साथ ही व्यापारिक गतिविधियों और स्थानीय आवागमन को भी सुविधा मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है।
स्टेट हाईवे पर केवल व्यावसायिक वाहनों से लिया जाएगा शुल्क
इधर राज्य सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि स्टेट हाईवे पर टोल शुल्क केवल व्यावसायिक वाहनों से ही लिया जाएगा। विधान परिषद में परिवहन मंत्री दामोदर रावत ने कहा कि सड़क और आधारभूत ढांचे के विकास के लिए शुल्क व्यवस्था आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में नियमावली पहले ही अधिसूचित की जा चुकी है, जबकि विस्तृत लिखित आदेश जारी होना बाकी है।
सरकार ने दोहराया अपना रुख
परिवहन मंत्री ने सदन में यह भी कहा कि सरकार के निर्णय के अनुसार केवल पीले रंग की नंबर प्लेट वाले व्यावसायिक वाहनों से ही स्टेट हाईवे पर टोल वसूला जाएगा। उन्होंने बताया कि निजी वाहनों पर यह व्यवस्था लागू नहीं होगी। सरकार का कहना है कि सड़क गुणवत्ता बनाए रखने और नई परियोजनाओं के विकास के लिए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है।