बिहार

HumanRights Case – शिक्षक की गिरफ्तारी पर NHRC ने मांगी पुलिस से रिपोर्ट

HumanRights Case – पटना के चर्चित शिक्षकों के बीच चल रहे विवाद ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। कोचिंग संचालक रौशन आनंद की गिरफ्तारी से जुड़ा मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) तक पहुंच गया है। आयोग ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए पटना पुलिस से इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। हाल ही में जमानत मिलने के बाद रौशन आनंद जेल से बाहर आए हैं और उन्होंने अपनी गिरफ्तारी को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

nhrc seeks report on teacher arrest

मानवाधिकार आयोग ने जारी किया नोटिस

जानकारी के अनुसार, पटना स्थित एक कोचिंग संस्थान के निदेशक रौशन आनंद के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी और उनकी गिरफ्तारी को लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ता विशाल रंजन दफ्तुआर ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत मिलने के बाद आयोग ने पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किया है।

आयोग ने संबंधित अधिकारियों से दो सप्ताह के भीतर मामले में की गई कार्रवाई और गिरफ्तारी की परिस्थितियों से जुड़ी रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा है। नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया मानवाधिकारों के संभावित उल्लंघन की ओर संकेत करते हैं।

शिकायत में गिरफ्तारी प्रक्रिया पर उठाए गए सवाल

आयोग को भेजी गई शिकायत में दावा किया गया है कि रौशन आनंद को एक आपराधिक मामले में पर्याप्त साक्ष्यों के बिना गिरफ्तार किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पुलिस ने मामले की गहन जांच किए बिना गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि प्राथमिकी दर्ज होने के कुछ ही समय बाद गिरफ्तारी कर ली गई, जबकि उपलब्ध तथ्यों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि किए जाने की आवश्यकता थी। इन आरोपों की सत्यता की जांच अब संबंधित एजेंसियों और आयोग की प्रक्रिया के तहत की जाएगी।

मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत संज्ञान

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की पीठ ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के प्रावधानों के तहत मामले पर संज्ञान लिया है। आयोग का उद्देश्य यह जांचना है कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया और उससे जुड़ी परिस्थितियां कानूनी मानकों और मानवाधिकारों के अनुरूप थीं या नहीं।

फिलहाल आयोग ने केवल रिपोर्ट तलब की है और अंतिम निष्कर्ष जांच एवं संबंधित पक्षों से प्राप्त जानकारी के आधार पर ही निकाला जाएगा।

जमानत के बाद रौशन आनंद के आरोप

जेल से रिहा होने के बाद रौशन आनंद ने सार्वजनिक रूप से अपनी गिरफ्तारी पर सवाल उठाए थे। उन्होंने दावा किया था कि उनके खिलाफ दर्ज मामला तथ्यों के अनुरूप नहीं था और उन्हें गलत तरीके से कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा।

उन्होंने यह भी कहा था कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सभी तथ्यों को स्पष्ट रूप से सामने लाया जा सके। उनके बयानों के बाद यह विवाद शिक्षा जगत और सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ है।

भाई की मौत को लेकर भी उठे सवाल

रौशन आनंद ने अपने भाई प्रिंस यादव की मौत को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रिंस यादव की हाल ही में नेपाल के विराटनगर में मृत्यु हुई थी। इस घटना के बाद कई तरह के सवाल उठे और मामले ने अतिरिक्त संवेदनशीलता हासिल कर ली।

हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि किसी आधिकारिक जांच रिपोर्ट से नहीं हुई है। संबंधित एजेंसियां उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मामले की जांच कर रही हैं।

दूसरी ओर से भी जांच की मांग

विवाद में नाम आने के बाद फैजल खान, जिन्हें खान सर के नाम से भी जाना जाता है, ने सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने प्रिंस यादव की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी।

फिलहाल गिरफ्तारी, मानवाधिकार शिकायत और संबंधित आरोपों को लेकर अलग-अलग स्तर पर प्रक्रियाएं जारी हैं। आयोग की रिपोर्ट और जांच एजेंसियों के निष्कर्ष आने के बाद ही मामले की स्थिति और अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

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