Kamenath Temple Gaya – बिहार के गया में स्थित बाबा कामनाथ मंदिर में सावन पर उमड़ी भीड़
Kamenath Temple Gaya – बिहार के गया जिले में इमामगंज प्रखंड के अंतर्गत आने वाले यमुना गांव का माहौल इन दिनों पूरी तरह शिवमय हो चुका है। यहां स्थित प्राचीन बाबा कामनाथ मंदिर में सावन के पवित्र महीने की शुरुआत के साथ ही भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया है। सुबह के पहले प्रहर से ही मंदिर के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं की लंबी लाइनें देखने को मिल रही हैं। दूर-दूर से आ रहे भक्त अपनी-अपनी बारी का इंतजार करते हुए भोलेनाथ के प्रति अपनी अगाध आस्था प्रकट कर रहे हैं। मंदिर परिसर और आसपास का पूरा क्षेत्र लगातार ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय बाबा कामनाथ’ के गूंजते जयकारों से गवाह बन रहा है।

दूर-दराज के इलाकों से पहुंच रहे हैं श्रद्धालु
बाबा कामनाथ मंदिर की प्रसिद्धि केवल स्थानीय गांव तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पास के दर्जनों गांवों और अन्य जिलों से भी लोग यहां दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। सावन के इस महीने में श्रद्धालु पवित्र नदियों से जल लेकर आते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। कई भक्त विशेष पूजा-अर्चना के साथ रुद्राभिषेक का आयोजन भी करवा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जो भी श्रद्धालु यहां सच्चे दिल से प्रार्थना करता है, उसकी हर मनोकामना बाबा जरूर पूरी करते हैं। इसी अटूट विश्वास के कारण हर उम्र के लोग, बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, अपनी श्रद्धा अर्पित करने यहां लगातार आ रहे हैं।
मंदिर में जलने वाले अखंड दीप की है अनूठी मान्यता
मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य बलम पाठक ने बताया कि इस ऐतिहासिक मंदिर में पूरे साल एक अखंड दीप प्रज्ज्वलित रहता है, जो कभी बुझता नहीं है। हालांकि, सावन के महीने में इस दीप की महत्ता और भी ज्यादा बढ़ जाती है। पौराणिक धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के दौरान इस अखंड ज्योति के दर्शन करने और बाबा कामनाथ को जल चढ़ाने से इंसान के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। आचार्य के अनुसार, इस अवधि में की गई विशेष पूजा से अकाल मृत्यु का भय भी खत्म हो जाता है और जीवन में सुख-शांति का वास होता है।
सोमवार को दोगुनी हो जाती है भक्तों की संख्या
यूं तो पूरे सावन में ही यहां चहल-पहल बनी रहती है, लेकिन सावन के सोमवार को माहौल और अधिक भव्य हो जाता है। सोमवार के दिन भोर से ही श्रद्धालुओं की कतारें कई किलोमीटर तक पहुंच जाती हैं। लोग पूरे विधि-विधान से पूजा करके अपने परिवार की अच्छी सेहत, समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना करते हैं। स्थानीय समुदाय के लिए यह मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं है, बल्कि उनकी बरसों पुरानी आस्था, संस्कृति और परंपरा का एक बड़ा प्रतीक बन चुका है।