बिहार

Migration – बिहार बदलाव तक बिहटा आश्रम में रहेंगे प्रशांत किशोर

Migration – जन सुराज अभियान के प्रमुख प्रशांत किशोर ने अब पटना स्थित अपने पुराने आवास को छोड़कर बिहटा में बने जन सुराज आश्रम को नया ठिकाना बना लिया है। बुधवार को दरभंगा दौरे के दौरान उन्होंने खुद इस फैसले की जानकारी दी। प्रशांत किशोर इन दिनों बिहार नवनिर्माण अभियान के तहत राज्यभर का दौरा कर रहे हैं और अलग-अलग जिलों में संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं तथा पदाधिकारियों के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं।

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दरभंगा दौरे में संगठन के साथ बैठक

दरभंगा पहुंचने पर प्रशांत किशोर ने लहेरियासराय के पोलो ग्राउंड स्थित नेहरू स्टेडियम में जन सुराज की विभिन्न सांगठनिक इकाइयों के साथ विस्तृत बैठक की। यह उनका जिले का दूसरा दौरा बताया गया। बैठक में संगठन विस्तार, आगामी रणनीति और बिहार के मौजूदा राजनीतिक हालात पर चर्चा की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे।

बिहटा आश्रम को बनाया नया ठिकाना

मीडिया से बातचीत के दौरान प्रशांत किशोर ने कहा कि उन्होंने अपना निजी आवास छोड़ दिया है और अब वे बिहटा में बने जन सुराज आश्रम में रहेंगे। उनका कहना था कि बिहार में व्यापक बदलाव आने तक वे वहीं से अपनी राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने इसे एक प्रतीकात्मक कदम बताते हुए कहा कि उनका पूरा ध्यान अब राज्य में वैकल्पिक राजनीति को मजबूत करने पर है।

सरकार पर उठाए कई सवाल

बिहार में नई सरकार के छह महीने पूरे होने को लेकर पूछे गए सवाल पर प्रशांत किशोर ने सरकार की कार्यशैली पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केवल चेहरे बदलने से व्यवस्था नहीं बदलती। राज्य में बेरोजगारी, पलायन और युवाओं की समस्याएं अब भी पहले जैसी बनी हुई हैं। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि चुनाव के दौरान जिस नेतृत्व को बदलाव का चेहरा बताया गया था, वही अब राज्य से बाहर चला गया, लेकिन पलायन की समस्या जस की तस बनी हुई है।

रोजगार और युवाओं के मुद्दे पर टिप्पणी

प्रशांत किशोर ने रोजगार के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर नौकरी देने के दावे किए गए थे, लेकिन छह महीने बाद भी युवाओं को कोई ठोस राहत नहीं मिली है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों और युवाओं के साथ प्रशासनिक सख्ती की पुरानी प्रवृत्ति भी खत्म नहीं हुई है।

उन्होंने कहा कि बिहार में आम युवाओं के मुकाबले राजनीतिक परिवारों के बच्चों को आसानी से अवसर मिल जाते हैं। चाहे वे योग्य हों या नहीं, उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता मिल जाता है, जबकि पढ़े-लिखे युवा लंबे संघर्ष के बाद भी रोजगार के लिए भटकते रहते हैं।

शिक्षा और वोटिंग पैटर्न पर बयान

प्रशांत किशोर ने पेपर लीक और भ्रष्टाचार के मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि जब तक जनता शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर मतदान नहीं करेगी, तब तक हालात बदलना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय छोटी रकम लेकर वोट देने की प्रवृत्ति बाद में जनता पर ही आर्थिक बोझ बनकर लौटती है।

कार्यक्रम में किशोर कुमार मुन्ना, प्रोफेसर रामबली चंद्रवंशी, जितेंद्र मिश्रा, सरवर अली, ललन यादव, रत्नेश्वर ठाकुर, निर्मल मिश्रा, मुमताज अंसारी और अनूप मैथिल समेत कई स्थानीय नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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