Monsoon – बिहार में कमजोर बारिश से नदियों का जलस्तर चिंताजनक, खेती पर बढ़ा संकट…
Monsoon– बिहार में मानसून के आगमन को लगभग एक महीना होने वाला है, लेकिन राज्य के अधिकांश हिस्सों में अब भी अपेक्षित बारिश नहीं हुई है। इसका असर नदियों के जलस्तर से लेकर कृषि गतिविधियों तक साफ दिखाई दे रहा है। जल संसाधन विभाग और मौसम विभाग के उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि राज्य की कई नदियों में पानी सामान्य से काफी कम है, जबकि अनेक मौसमी नदियां अभी तक सूखी पड़ी हैं। कम वर्षा के कारण किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है और कई क्षेत्रों में पेयजल की समस्या भी सामने आने लगी है।

आधे से अधिक नदियों में सामान्य प्रवाह नहीं
राज्य की प्रमुख 81 नदियों की निगरानी के दौरान सामने आया है कि 20 नदियां पूरी तरह सूखी हैं, जबकि 22 नदियों में जलस्तर इतना कम है कि उनका प्रवाह बेहद कमजोर बना हुआ है। गंगा, कोसी, गंडक और सोन जैसी बड़ी नदियों में भी सामान्य क्षमता के मुकाबले काफी कम पानी दर्ज किया गया है। फिलहाल किसी भी नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब नहीं पहुंचा है, जो इस समय के लिहाज से असामान्य स्थिति मानी जा रही है।
कम बारिश का सीधा असर खेती पर
मानसून की सुस्ती का सबसे बड़ा प्रभाव कृषि कार्यों पर पड़ा है। धान की रोपाई की रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है और अब तक केवल लगभग सात प्रतिशत क्षेत्र में ही रोपनी का काम पूरा हो सका है। राज्य के 18 जिलों में कई जगह रोपाई की शुरुआत भी नहीं हो पाई है। पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसान सिंचाई के लिए वैकल्पिक साधनों पर निर्भर हो रहे हैं, जबकि पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता को लेकर भी चिंता बढ़ती जा रही है।
वर्षा का आंकड़ा सामान्य से काफी कम
मौसम विभाग के अनुसार बिहार में 11 जून को मानसून ने प्रवेश किया था, लेकिन 6 जुलाई तक सामान्य के मुकाबले करीब 55 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई। जहां इस अवधि में लगभग 230 मिलीमीटर वर्षा होनी चाहिए थी, वहीं अब तक केवल 103 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। कम वर्षा के चलते कई इलाकों में भूजल स्तर भी नीचे खिसकने लगा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता प्रभावित होने लगी है।
जल संसाधन विभाग लगातार रख रहा निगरानी
बाढ़ के मौसम को देखते हुए जल संसाधन विभाग राज्य की 81 नदियों पर नियमित निगरानी कर रहा है। इसके लिए 117 स्थानों पर जलस्तर और वर्षा मापने की व्यवस्था की गई है। विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार अभी किसी भी नदी में बाढ़ जैसी स्थिति नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण इस बार अधिकांश नदियों में सामान्य जल प्रवाह विकसित नहीं हो पाया है।
बड़ी नदियों में भी सामान्य से कम जलप्रवाह
नेपाल से आने वाली कोसी नदी में इस वर्ष अधिकतम करीब 1.86 लाख क्यूसेक पानी दर्ज किया गया, जबकि ऐतिहासिक रिकॉर्ड इससे कई गुना अधिक रहा है। इसी तरह गंडक, सोन और उत्तरी कोयल जैसी नदियों में भी जलप्रवाह सामान्य स्तर से काफी नीचे बना हुआ है। जल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में लगातार बारिश नहीं हुई तो जल संसाधनों और कृषि दोनों पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
इन जिलों में भारी बारिश की संभावना
मौसम विज्ञान केंद्र, पटना ने मंगलवार के लिए राज्य के कुछ जिलों में भारी वर्षा का पूर्वानुमान जारी किया है। बांका, भागलपुर और पश्चिम चंपारण में भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। वहीं कटिहार और किशनगंज के लिए अतिभारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि उत्तर बिहार के कुछ हिस्सों में सप्ताह भर वर्षा की गतिविधियां बनी रह सकती हैं, जबकि दक्षिण बिहार में भी कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
तापमान में गिरावट के संकेत
बादलों की आवाजाही बढ़ने के कारण आने वाले दिनों में अधिकतम तापमान में कुछ कमी आने की संभावना है। मुजफ्फरपुर सहित उत्तर बिहार के कई जिलों में अगले कुछ दिनों के दौरान रुक-रुककर बारिश हो सकती है। विभाग के अनुसार अधिकतम तापमान 33 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। इस दौरान उमस बनी रह सकती है, लेकिन राज्य में लू जैसी स्थिति बनने की संभावना नहीं है।