बिहार

NEET Scam – पुनर्परीक्षा मामले में ईओयू की जांच में सामने आए नए खुलासे

NEET Scam – बिहार में आयोजित नीट पुनर्परीक्षा से जुड़े कथित गड़बड़ी मामले की जांच अब और गहराती जा रही है। राज्य सरकार के निर्देश के बाद आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने इस पूरे प्रकरण की कमान संभाल ली है और लखीसराय में दर्ज मामलों की तकनीकी व दस्तावेजी जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने परीक्षा प्रक्रिया की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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गिरफ्तार अभ्यर्थी की पहचान को लेकर बड़ा खुलासा

जांच एजेंसियों के अनुसार, लखीसराय के एक परीक्षा केंद्र से पकड़े गए व्यक्ति की पहचान शुरू में पीएमसीएच के छात्र मयंक कश्यप के रूप में हुई थी। हालांकि बाद की जांच में पता चला कि उसका वास्तविक नाम अश्विनी कुमार है। वह पीएमसीएच के 2022 बैच का छात्र बताया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि उसने अपनी असली पहचान छिपाने के लिए दूसरे नाम का इस्तेमाल किया था। मामले से जुड़े दस्तावेजों और शैक्षणिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।

बायोमेट्रिक सत्यापन में अनियमितताओं की आशंका

जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि परीक्षा केंद्रों पर पहचान सत्यापन की प्रक्रिया में कथित तौर पर गंभीर लापरवाही बरती गई। आरोप है कि बायोमेट्रिक जांच से जुड़े कुछ कर्मियों ने निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया, जिससे फर्जी अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने का अवसर मिला। अधिकारियों का मानना है कि यदि प्रारंभिक सत्यापन प्रक्रिया सही ढंग से की जाती, तो इस तरह की स्थिति को रोका जा सकता था।

कई कर्मी और मेडिकल छात्र जांच के दायरे में

पुलिस कार्रवाई के दौरान बायोमेट्रिक व्यवस्था से जुड़े कई कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया है। इनके अलावा विभिन्न मेडिकल संस्थानों से जुड़े कुछ छात्रों की भूमिका भी जांच के घेरे में आई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित नेटवर्क किस तरह काम कर रहा था और इसमें किन-किन लोगों की भागीदारी रही। सभी आरोपों की पुष्टि साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर की जा रही है।

कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल

जांच में पीएमसीएच से जुड़े कुछ प्रशासनिक पहलुओं की भी समीक्षा की जा रही है। जानकारी के अनुसार, आरोपी छात्र को कॉलेज हॉस्टल में आवास आवंटित था, लेकिन वह कथित तौर पर बाहर रह रहा था। इस संबंध में कॉलेज प्रशासन को पूर्व जानकारी थी या नहीं, इसकी पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि छात्र गतिविधियों की निगरानी व्यवस्था की भी समीक्षा आवश्यक है।

उपस्थिति रिकॉर्ड की हो रही जांच

मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू छात्र की उपस्थिति से जुड़ा है। प्रारंभिक जांच में यह जानकारी सामने आई है कि जिस दिन पुनर्परीक्षा आयोजित हुई, उसी दिन कॉलेज में उसकी उपस्थिति दर्ज होने का दावा किया गया। अब यह जांच की जा रही है कि उपस्थिति रिकॉर्ड वास्तविक था या उसमें किसी प्रकार की अनियमितता हुई। इस संबंध में कॉलेज के विभिन्न विभागों से विस्तृत जानकारी मांगी गई है।

स्वास्थ्य विभाग ने मांगी रिपोर्ट

घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने कॉलेज प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। संस्थान के प्राचार्य ने भी आंतरिक जांच शुरू करने के निर्देश दिए हैं। विभागीय स्तर पर छात्रों की उपस्थिति, हॉस्टल रिकॉर्ड और अन्य संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा की जा रही है। जांच एजेंसियों का कहना है कि सभी तथ्यों की पुष्टि के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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