Punishment – बच्ची से दुष्कर्म और हत्या मामले में दोषी की फांसी की सजा बरकरार…
Punishment- बिहार के सासाराम में 10 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या के बहुचर्चित मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने दोषी को दी गई फांसी की सजा को बरकरार रखा है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश (विशेष पॉक्सो कोर्ट) अरविंद की अदालत ने आरोपी बलराम सिंह उर्फ बलिराम कुमार सिंह, निवासी गंगौली (डालमियानगर थाना क्षेत्र), पर 1.10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि पीड़ित परिवार को पहले ही आठ लाख रुपये की प्रतिकर राशि प्रदान की जा चुकी है। यह फैसला पटना हाईकोर्ट के निर्देश पर दोबारा हुई सुनवाई के बाद सुनाया गया।

दोबारा सुनवाई के बाद आया फैसला
यह मामला वर्ष 2020 का है, जिसमें विशेष अदालत पहले भी आरोपी को दोषी ठहराकर मृत्युदंड सुना चुकी थी। बाद में आरोपी ने इस फैसले को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने मामले की पुनः सुनवाई के निर्देश दिए, जिसके बाद विशेष पॉक्सो अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का दोबारा परीक्षण किया। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने पहले दिए गए फैसले को सही मानते हुए फांसी की सजा यथावत रखी।
दादी की शिकायत पर दर्ज हुआ था मामला
मृत बच्ची की दादी ने स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए बताया था कि 14 नवंबर 2020 की शाम उनकी पोती अचानक लापता हो गई थी। तलाश के दौरान ग्रामीणों से जानकारी मिली कि आरोपी बच्ची को धार्मिक तस्वीर दिखाने के बहाने अपने घर ले गया था। जब परिजन आरोपी के घर पहुंचे तो मुख्य दरवाजे पर ताला लगा मिला। इसके बाद तत्काल पुलिस को सूचना दी गई और जांच शुरू हुई।
आरोपी के घर से मिला था बच्ची का शव
पुलिस और ग्रामीणों की मौजूदगी में आरोपी को तलाश कर लाया गया। घर का ताला खुलवाने पर लकड़ी के एक बक्से के भीतर बच्ची का शव बरामद हुआ। पुलिस के अनुसार शव अर्धनग्न अवस्था में था और शरीर पर गंभीर चोटों के निशान मिले थे। मेडिकल जांच और घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया।
अदालत ने साक्ष्यों को माना पर्याप्त
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। अदालत ने इन सभी तथ्यों को पर्याप्त मानते हुए आरोपी को दोषी करार दिया। पहले वर्ष 2021 में सुनाई गई फांसी की सजा को पुनः वैध ठहराते हुए अदालत ने आर्थिक दंड भी लगाया। फैसले के बाद स्थानीय लोगों ने इसे न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय बताया।