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BullionDuty – सोना-चांदी आयात महंगा, बाजार और निवेशकों पर असर

BullionDuty – केंद्र सरकार ने सोने और चांदी के आयात पर लगने वाली ड्यूटी में बड़ा बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत अब इन कीमती धातुओं पर 10 प्रतिशत बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5 प्रतिशत एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस लगाया गया है। इसके बाद प्रभावी आयात शुल्क बढ़कर 15 प्रतिशत हो गया है। यह फैसला मंगलवार रात से लागू कर दिया गया।

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सरकार के इस कदम का असर सर्राफा बाजार से लेकर शेयर बाजार तक देखने को मिल सकता है। जानकारों का मानना है कि सोने और चांदी की कीमतों में तेजी आ सकती है, जबकि ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों पर दबाव बढ़ सकता है।

ज्वेलरी कारोबार पर दिख सकता है असर

नई ड्यूटी लागू होने के बाद आभूषण उद्योग की लागत बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर ग्राहकों और ज्वेलरी कारोबारियों दोनों पर पड़ेगा।

पिछले कुछ दिनों से ड्यूटी बढ़ने की अटकलों के बीच ही कई ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली थी। टाइटन, कल्याण ज्वेलर्स और सेन्को गोल्ड जैसी कंपनियों के शेयरों में 10 से 15 प्रतिशत तक की कमजोरी दर्ज की गई थी। इससे इन कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में भी बड़ी गिरावट आई।

सरकार विदेशी मुद्रा बचाने पर दे रही जोर

सरकार का उद्देश्य सोने के आयात को नियंत्रित करना और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करना बताया जा रहा है। भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है और हर साल बड़ी मात्रा में सोने का आयात करता है।

आंकड़ों के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में भारत ने रिकॉर्ड स्तर पर सोने का आयात किया। इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त दबाव पड़ा। विशेषज्ञों का कहना है कि आयात कम होने से डॉलर की बचत हो सकती है और चालू खाता घाटा नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी।

प्लेटिनम और अन्य उत्पाद भी दायरे में

सरकार ने केवल सोने और चांदी पर ही नहीं, बल्कि प्लेटिनम और उससे जुड़े उत्पादों पर भी ड्यूटी बढ़ाई है। इसके अलावा रीसाइक्लिंग के लिए आयात किए जाने वाले कुछ विशेष उत्पादों पर भी नई शर्तों के साथ शुल्क लागू किया गया है।

वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, पुराने कस्टम नियमों में संशोधन करते हुए यह बदलाव लागू किए गए हैं। इससे कीमती धातुओं के आयात से जुड़े कारोबार पर व्यापक असर पड़ सकता है।

प्रधानमंत्री की अपील के बाद बढ़ी चर्चा

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से कुछ समय तक सोने की खरीद सीमित रखने की अपील की थी। उन्होंने विदेशी मुद्रा बचाने के लिए आयात पर निर्भरता कम करने की जरूरत पर जोर दिया था।

इसके बाद बाजार में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सोने की मांग में कमी आती है तो विदेशी मुद्रा की बड़ी बचत हो सकती है। हालांकि इस अनुमान को लेकर अलग-अलग आर्थिक विशेषज्ञों की राय अलग है।

निवेशकों की नजर बाजार पर

नई ड्यूटी लागू होने के बाद अब निवेशकों और कारोबारियों की नजर घरेलू सर्राफा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर टिकी हुई है। जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।

बाजार विशेषज्ञ लोगों को निवेश से पहले आधिकारिक जानकारी और बाजार की स्थिति को समझने की सलाह दे रहे हैं, ताकि जल्दबाजी में लिया गया फैसला नुकसान का कारण न बने।

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