CurrencyNote – बाजार में घट रही है 200 रुपये के नोट की हिस्सेदारी
CurrencyNote– भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 200 रुपये का नोट अब प्रचलन में मौजूद प्रमुख मूल्य वर्गों की तुलना में कम दिखाई दे रहा है। कभी 100 और 500 रुपये के नोटों के बीच की जरूरत को पूरा करने के उद्देश्य से जारी किया गया यह नोट अब कुल चलन में मौजूद मुद्रा का केवल 6.13 प्रतिशत हिस्सा रह गया है। इसके विपरीत 500 रुपये का नोट सबसे अधिक उपयोग में बना हुआ है और कुल प्रचलित नोटों में उसकी हिस्सेदारी सबसे ज्यादा दर्ज की गई है।

500 रुपये का नोट बना सबसे अधिक प्रचलित
आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक देश में इस समय लगभग 176.55 अरब नोट प्रचलन में हैं। इनमें 500 रुपये के नोटों की हिस्सेदारी 41.25 प्रतिशत है, जो सभी मूल्य वर्गों में सबसे अधिक है। वहीं 100 रुपये के नोट 16.03 प्रतिशत और 10 रुपये के नोट 15.94 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ बड़ी संख्या में लेनदेन का हिस्सा बने हुए हैं। इन आंकड़ों के बीच 200 रुपये के नोट की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत काफी कम दिखाई देती है।
बाजार में सीमित रहा 200 रुपये के नोट का उपयोग
बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि 200 रुपये का नोट अपेक्षित स्तर पर लोकप्रिय नहीं हो सका। ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रवीण मिश्र के अनुसार, छोटे भुगतान के लिए अधिकांश लोग 100 रुपये के नोट को अधिक सुविधाजनक मानते हैं, जबकि बड़े भुगतान के लिए 500 रुपये का नोट प्राथमिक विकल्प बना रहता है। ऐसे में 200 रुपये का नोट दोनों के बीच अपनी अलग उपयोगिता स्थापित नहीं कर पाया।
डिजिटल भुगतान का भी पड़ा असर
आर्थिक मामलों के जानकार अंकुर गोयल का कहना है कि डिजिटल भुगतान के लगातार बढ़ते उपयोग ने भी 200 रुपये के नोट की मांग को प्रभावित किया है। उनका कहना है कि अधिकांश एटीएम से भी मुख्य रूप से 100 और 500 रुपये के नोट ही उपलब्ध होते हैं। व्यापारिक लेनदेन में भी इन्हीं दोनों मूल्य वर्गों का इस्तेमाल अधिक होने से 200 रुपये का नोट आम लोगों तक अपेक्षाकृत कम पहुंच रहा है।
वर्ष 2017 में हुई थी शुरुआत
200 रुपये का नोट पहली बार 25 अगस्त 2017 को जारी किया गया था। इसका उद्देश्य 100 और 500 रुपये के नोटों के बीच की आवश्यकता को पूरा करना और नकद लेनदेन को अधिक सुविधाजनक बनाना था। उस समय उम्मीद जताई गई थी कि यह नोट रोजमर्रा के छोटे और मध्यम भुगतान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हालांकि समय के साथ इसकी उपलब्धता और उपयोग दोनों अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सके।
भविष्य में हिस्सेदारी पर रहेगी नजर
सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी आर.सी. शुक्ला का मानना है कि यदि एटीएम, बैंक शाखाओं और बाजार में 200 रुपये के नोट की उपलब्धता नहीं बढ़ती, तो आने वाले समय में इसकी हिस्सेदारी और कम हो सकती है। हालांकि यह पूरी तरह आरबीआई की मुद्रा प्रबंधन नीति और बाजार की मांग पर निर्भर करेगा। फिलहाल उपलब्ध आंकड़े यही संकेत देते हैं कि नकद लेनदेन में 100 और 500 रुपये के नोटों की भूमिका सबसे अधिक बनी हुई है।