बिज़नेस

EnergySupply – अमेरिका और रूस के जहाजों से भारत में ईंधन राहत के दिखे संकेत

EnergySupply – देश में ईंधन आपूर्ति को लेकर बनी चिंताओं के बीच एक असामान्य लेकिन महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। भारत के प्रमुख ऊर्जा केंद्र न्यू मंगलुरु बंदरगाह पर लगभग एक ही समय में अमेरिका और रूस से जहाज पहुंचे हैं, जो क्रमशः LPG और कच्चा तेल लेकर आए हैं। यह स्थिति ऐसे समय में बनी है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति और भू-राजनीतिक परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं।

india fuel supply us russia ships update

न्यू मंगलुरु बंदरगाह पर दो बड़े जहाजों की एंट्री
अधिकारियों के अनुसार, ‘पिक्सिस पायनियर’ नाम का जहाज अमेरिका के टेक्सास स्थित पोर्ट ऑफ नीदरलैंड से रवाना होकर भारत पहुंचा है। इस जहाज में करीब 16,714 टन LPG लाई गई है, जिसे देश की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एजिस लॉजिस्टिक्स को सौंपा जाएगा। इससे पहले ‘एक्वा टाइटन’ नाम का रूसी जहाज भी इसी बंदरगाह पर पहुंच चुका था, जो बड़ी मात्रा में कच्चा तेल लेकर आया है।

रूसी जहाज का बदला हुआ मार्ग
जानकारी के मुताबिक, ‘एक्वा टाइटन’ मूल रूप से चीन की ओर जा रहा था, लेकिन बीच रास्ते में इसका रूट बदलकर भारत की तरफ कर दिया गया। यह जहाज करीब 7.7 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर शनिवार शाम मंगलुरु तट के पास पहुंचा। इसके बाद समुद्र में स्थापित पाइपलाइन के जरिए इस तेल को मंगलुरु रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड तक पहुंचाया जा रहा है, जहां इसका प्रसंस्करण किया जाएगा।

सरकार ने आयात प्रक्रिया को बनाया आसान
ऊर्जा आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए सरकार ने भी कुछ अहम कदम उठाए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, 14 मार्च से 31 मार्च के बीच न्यू मंगलुरु पोर्ट पर कच्चे तेल और LPG से जुड़े कार्गो शुल्क को अस्थायी रूप से माफ किया गया है। इस फैसले का उद्देश्य आयात को तेज करना और परिचालन प्रक्रिया को सरल बनाना है, ताकि बाजार में ईंधन की उपलब्धता प्रभावित न हो।

वैश्विक तनाव के बीच भारत की स्थिति
हाल के दिनों में रूस से तेल आयात को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं तेज रही हैं, खासकर अमेरिका के साथ संबंधों के संदर्भ में। इसके अलावा, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से आपूर्ति पर दबाव बना था। ऐसे में अमेरिका और रूस दोनों से एक साथ आपूर्ति का पहुंचना भारत के लिए संतुलन बनाने वाला कदम माना जा रहा है।

टैंकरों ने बदले रास्ते, आपूर्ति में बदलाव
डेटा रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘एक्वा टाइटन’ अकेला ऐसा जहाज नहीं है जिसने अपना मार्ग बदला है। कम से कम सात अन्य टैंकर भी चीन की ओर जाते हुए बीच रास्ते में दिशा बदल चुके हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि वैश्विक ऊर्जा व्यापार में परिस्थितियों के अनुसार तेजी से बदलाव हो रहा है और देश अपनी जरूरतों के अनुसार रणनीति अपना रहे हैं।

भूमिगत LPG भंडारण सुविधा की अहमियत
इस पूरे घटनाक्रम का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि मंगलुरु में देश की सबसे बड़ी भूमिगत LPG भंडारण सुविधा स्थित है। यह सुविधा समुद्र तल से करीब 225 मीटर नीचे बनाई गई है और इसकी कुल क्षमता 80,000 मीट्रिक टन है। सितंबर 2025 में शुरू हुई इस परियोजना को देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा कदम माना जाता है।

ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से सकारात्मक संकेत
अमेरिका और रूस से एक साथ ईंधन आपूर्ति का आना भारत के लिए राहत भरा संकेत माना जा रहा है। इससे न केवल तत्काल आपूर्ति की स्थिति सुधर सकती है, बल्कि यह भी स्पष्ट होता है कि भारत विभिन्न स्रोतों से ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में सक्रिय है।

Related Articles

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.