EnergyTalks – ऊर्जा और व्यापार सहयोग पर जारी है यूरोप-यूएई दौरे की तैयारी
EnergyTalks – ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 से 20 मई के बीच कई यूरोपीय देशों और संयुक्त अरब अमीरात की महत्वपूर्ण यात्रा पर रवाना होंगे। इस दौरे को भारत की ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक व्यापार साझेदारी और रणनीतिक संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री इस यात्रा के दौरान कई शीर्ष नेताओं से मुलाकात करेंगे और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे।

यूएई दौरे से होगी यात्रा की शुरुआत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी विदेश यात्रा का पहला पड़ाव संयुक्त अरब अमीरात को बनाएंगे। 15 मई को वह अबू धाबी पहुंचेंगे, जहां उनकी मुलाकात यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से प्रस्तावित है। भारत और यूएई के बीच ऊर्जा, निवेश और व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत होते रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक सहयोग से जुड़े नए समझौते सामने आ सकते हैं।
यूएई भारत के प्रमुख ऊर्जा साझेदारों में शामिल है। इसके साथ ही निवेश के क्षेत्र में भी उसकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय के वहां रहने के कारण दोनों देशों के सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध भी काफी मजबूत माने जाते हैं।
यूरोपीय देशों के साथ रणनीतिक चर्चा
यूएई के बाद प्रधानमंत्री मोदी नीदरलैंड की यात्रा करेंगे। वहां उनकी मुलाकात डच नेतृत्व से होगी और दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग, नवाचार और व्यापार को लेकर बातचीत की जाएगी। बताया जा रहा है कि रक्षा उत्पादन, ग्रीन हाइड्रोजन और सेमीकंडक्टर जैसे उभरते क्षेत्रों पर विशेष फोकस रहेगा।
इसके बाद प्रधानमंत्री स्वीडन पहुंचेंगे, जहां वह स्वीडिश प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन के आमंत्रण पर कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। स्वीडन लंबे समय से तकनीकी विकास, हरित ऊर्जा और औद्योगिक नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी माना जाता है। भारत इन क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में प्रयास कर रहा है।
नॉर्वे में होगा भारत-नॉर्डिक सम्मेलन
यात्रा के अगले चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नॉर्वे जाएंगे। यहां वह भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन, हरित प्रौद्योगिकी, समुद्री सहयोग और टिकाऊ विकास जैसे विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। खास बात यह है कि कई दशकों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का नॉर्वे दौरा हो रहा है, जिससे इस यात्रा का कूटनीतिक महत्व और बढ़ गया है।
इटली में उच्चस्तरीय वार्ता की संभावना
प्रधानमंत्री की यात्रा का अंतिम चरण इटली में होगा। यहां उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से प्रस्तावित है। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, उभरती तकनीकों और निवेश के अवसरों पर विस्तृत चर्चा होने की उम्मीद है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह दौरा भारत और यूरोपीय देशों के बीच बहुआयामी संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नई तकनीकों और हरित विकास पर रहेगा जोर
सरकारी सूत्रों के मुताबिक इस पूरे दौरे के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्टार्टअप, जलवायु परिवर्तन, मजबूत सप्लाई चेन और हरित ऊर्जा जैसे विषय प्रमुख एजेंडा में शामिल रहेंगे। भारत वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में ऊर्जा स्रोतों को सुरक्षित और विविध बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है। ऐसे में यह यात्रा आर्थिक और रणनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।