FuelPrices – वैश्विक तेल संकट के बीच भारत में स्थिर नजर आई कीमतें
FuelPrices – मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच जारी टकराव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर साफ नजर आ रहा है। कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं। इसके बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह स्थिति आम उपभोक्ताओं के लिए राहत भले ही हो, लेकिन तेल कंपनियों के लिए आर्थिक दबाव का कारण बन रही है।

घरेलू बाजार में कीमतें स्थिर
3 अप्रैल की सुबह जारी दरों के अनुसार, दिल्ली में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। सामान्य पेट्रोल लगभग 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर मिल रहा है। वहीं प्रीमियम श्रेणी के ईंधन जैसे XP95 पेट्रोल और XG डीजल की कीमतें भी तय स्तर पर बनी हुई हैं। यह स्थिरता उस समय बनी हुई है जब वैश्विक स्तर पर कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है।
तेल कंपनियों पर बढ़ता आर्थिक दबाव
विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय कीमतों और घरेलू दरों के बीच बढ़ते अंतर का असर तेल विपणन कंपनियों पर पड़ रहा है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, कंपनियों को पेट्रोल पर प्रति लीटर करीब 24 रुपये और डीजल पर लगभग 104 रुपये तक का नुकसान हो रहा है। इस अंतर को उद्योग में अंडर-रिकवरी कहा जाता है, जिसे कंपनियां अपने मुनाफे से समायोजित कर रही हैं।
सरकार ने क्यों नहीं बढ़ाई कीमतें
सरकार ने आम लोगों को राहत देने के उद्देश्य से फिलहाल कीमतों में बढ़ोतरी से परहेज किया है। पहले ही एक्साइज ड्यूटी में कटौती की जा चुकी है और तेल कंपनियों से भी कीमतें स्थिर रखने को कहा गया है। हालांकि, वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जिससे उत्पादन लागत में काफी इजाफा हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी का असर
दुनिया के कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कुछ देशों में तो कीमतें लगभग दोगुनी तक हो गई हैं। एशिया और अन्य क्षेत्रों में आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाएं इस बढ़ोतरी का सीधा असर झेल रही हैं, जिससे महंगाई पर भी दबाव बढ़ा है।
भारत में सप्लाई को लेकर स्थिति सामान्य
सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। अगले करीब दो महीनों के लिए कच्चे तेल की उपलब्धता सुनिश्चित कर ली गई है। रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं, जिससे पेट्रोल, डीजल और अन्य उत्पादों की आपूर्ति में कोई बाधा नहीं है।
अन्य देशों में कीमतों में तेज उछाल
अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार, कई देशों में ईंधन की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। म्यांमार, लाओस और फिलीपींस जैसे देशों में पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है। इसके अलावा मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में भी कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।
आगे की स्थिति पर नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में अगर वैश्विक तनाव बना रहता है, तो भारत में भी कीमतों को लेकर दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल सरकार और कंपनियां संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन बाजार की दिशा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।


