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GoldInvestment – अक्षय तृतीया से पहले सोना खरीदने पर बढ़ी दिलचस्पी

GoldInvestment – सोने की कीमतों में इस साल आए उतार-चढ़ाव के बीच अक्षय तृतीया से पहले निवेशकों और खरीदारों के बीच एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पिछले एक साल में सोने ने मजबूत रिटर्न दिया है, जिससे यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या इस बार भी त्योहार पर सोना खरीदना फायदे का सौदा साबित होगा। बाजार के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2025 की अक्षय तृतीया के बाद से सोने की कीमतों में करीब 60 प्रतिशत तक उछाल देखा गया है, जिसने निवेशकों को अच्छा लाभ दिया है।

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अक्षय तृतीया का सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व

भारत में अक्षय तृतीया का पर्व सिर्फ धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आर्थिक नजरिए से भी खास माना जाता है। इस दिन सोना खरीदना शुभ माना जाता है और इसे समृद्धि का प्रतीक समझा जाता है। इस वर्ष यह पर्व 19 अप्रैल 2026 को मनाया जाएगा। परंपरा के साथ-साथ पिछले वर्षों के आंकड़े भी यह संकेत देते हैं कि इस मौके पर किया गया निवेश कई बार फायदेमंद साबित हुआ है।

कीमतों में हालिया गिरावट ने बढ़ाई उम्मीद

इस साल की शुरुआत में सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थीं। जनवरी में यह करीब 1,80,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक गया, जिसके बाद इसमें गिरावट आई और अब कीमतें लगभग 1,50,000 रुपये के आसपास बनी हुई हैं। हालिया गिरावट को कई निवेशक एक अवसर के रूप में देख रहे हैं, क्योंकि यह अपने उच्च स्तर से काफी नीचे है।

मांग पर मिलाजुला असर

बाजार के जानकारों के मुताबिक, अक्षय तृतीया से पहले मांग सामान्य रूप से मजबूत रहती है, लेकिन इस बार ऊंची कीमतों के कारण बड़े स्तर पर खरीदारी सीमित हो सकती है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक सोच-समझकर खरीदारी कर रहे हैं, जबकि ज्वेलरी की मांग में अपेक्षाकृत नरमी देखने को मिल रही है।

वैश्विक संकेत भी अहम

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। चीन जैसे बड़े बाजार में मांग कुछ कमजोर पड़ी है, लेकिन वहां का केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि लंबे समय में सोने को सुरक्षित निवेश के तौर पर देखा जा रहा है।

क्या अभी निवेश करना सही रहेगा?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्तर पर सोना स्थिर निवेश के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, इसमें तेज और त्वरित रिटर्न की उम्मीद करना सही नहीं होगा। निवेशकों को इसे अपने पोर्टफोलियो को संतुलित रखने के एक विकल्प के रूप में देखना चाहिए, न कि केवल मुनाफे के नजरिए से।

निवेश की रणनीति पर जोर

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सोने में एकमुश्त बड़ी राशि लगाने के बजाय धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर विकल्प हो सकता है। इससे जोखिम कम होता है और बाजार की चाल के अनुसार निवेश को संतुलित किया जा सकता है। जिन निवेशकों के पास पहले से सोना नहीं है, उनके लिए सीमित मात्रा में शुरुआत करना उचित माना जा रहा है।

आगे कीमतों की संभावनाएं

तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, अगर बाजार में तेजी बनी रहती है तो सोना आगे 1,55,000 रुपये से 1,70,000 रुपये तक पहुंच सकता है। वहीं अगर गिरावट आती है, तो 1,36,200 रुपये और उसके नीचे 1,27,500 रुपये के स्तर पर समर्थन मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों को बाजार की दिशा पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।

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