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HormuzShipping – सीजफायर के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य पर नए शुल्क की तेज हुई चर्चा

HormuzShipping – अमेरिका के साथ हालिया युद्धविराम के बाद ईरान से जुड़ी एक नई खबर अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत का ध्यान खींच रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, तेहरान अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की योजना पर विचार कर रहा है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है, ऐसे में इस तरह की किसी भी नीति का असर कई देशों, खासकर ऊर्जा आयात करने वाले देशों पर पड़ सकता है।

hormuz shipping toll after ceasefire

भारत-ईरान के बीच टोल पर कोई आधिकारिक बातचीत नहीं

भारत सरकार ने इन अटकलों पर स्थिति स्पष्ट कर दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि इस मुद्दे पर भारत और ईरान के बीच अब तक कोई बातचीत नहीं हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि इस विषय पर पहले भी सवाल उठे हैं, लेकिन आधिकारिक स्तर पर ऐसी कोई चर्चा सामने नहीं आई है। इससे यह संकेत मिलता है कि फिलहाल भारत इस संभावित शुल्क नीति का हिस्सा नहीं है।

सीमित रूप से फिर खुल सकता है अहम समुद्री मार्ग

हालात सामान्य करने की दिशा में ईरान ने संकेत दिए हैं कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सीमित रूप में फिर से खोला जा सकता है। एक ईरानी अधिकारी के मुताबिक, शुक्रवार से इस मार्ग को आंशिक रूप से चालू किया जा सकता है, हालांकि इसका नियंत्रण पूरी तरह ईरान के हाथ में रहेगा। गौरतलब है कि यह रणनीतिक जलमार्ग करीब छह सप्ताह तक संघर्ष की वजह से प्रभावित रहा, जिससे वैश्विक शिपिंग और तेल सप्लाई पर असर पड़ा था।

प्रति ट्रांजिट भारी शुल्क की संभावना

तेहरान की ओर से यह भी संकेत मिला है कि स्थायी शांति समझौते के तहत जहाजों से शुल्क लिया जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स में अनुमान जताया जा रहा है कि यह शुल्क प्रति जहाज करीब 20 लाख डॉलर तक हो सकता है। यह राशि काफी बड़ी मानी जा रही है, खासकर तब जब तेल परिवहन पहले से ही महंगा सौदा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह लागू होता है तो वैश्विक तेल कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

ईरान और ओमान मिलकर लागू कर सकते हैं शुल्क व्यवस्था

अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के अनुसार, इस योजना में ओमान की भी भूमिका हो सकती है। माना जा रहा है कि दोनों देश मिलकर इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लागू कर सकते हैं। युद्धविराम के बाद इस व्यवस्था को औपचारिक रूप देने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं, जिससे ईरान को एक नया राजस्व स्रोत मिल सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस आय का इस्तेमाल युद्ध के बाद पुनर्निर्माण कार्यों में किया जा सकता है।

संघर्ष के दौरान भारत को मिली थी विशेष छूट

तनावपूर्ण हालात के बीच ईरान ने कुछ देशों को ‘मित्र’ बताते हुए उनके जहाजों को सुरक्षित मार्ग देने की अनुमति दी थी। इस सूची में भारत का नाम भी शामिल था। हाल ही में भारत के लिए एलपीजी लेकर एक जहाज सुरक्षित रूप से पहुंचा है। इससे पहले भी कई भारतीय जहाज इस मार्ग से होकर गुजर चुके हैं। इससे दोनों देशों के बीच सामरिक और व्यापारिक रिश्तों की झलक मिलती है।

वैश्विक बाजार पर संभावित असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह शुल्क नीति लागू होती है, तो इसका असर सिर्फ क्षेत्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर देखने को मिल सकता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का अतिरिक्त शुल्क या प्रतिबंध ऊर्जा बाजार में अस्थिरता ला सकता है।

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